चंडीगढ़। शहर में पार्किंग की समस्या बहुत बड़ी हो चुकी है लेकिन प्रशासन इसे दूर करने के लिए अब भी गंभीर नहीं है। मुख्य बाजारों की पार्किंग फुल रहती है, जिसकी वजह से कोई फुटपाथ तो कोई मोटरसाइकिल खड़ी करने की जगह पर कार खड़ी कर देता है। अफसर भले इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं लेकिन इस खींचतान में आम आदमी परेशान है। अमर उजाला ने मंगलवार को पार्किंग की व्यवस्था जांची तो हर जगह कमोबेश एक जैसी समस्या नजर आई।
शहर में कारों की संख्या 10 लाख से ज्यादा है। इसके अलावा पंचकूला, मोहाली व जीरकपुर समेत अन्य आसपास के इलाकों से भी रोजाना हजारों कारें चंडीगढ़ पहुंचती हैं लेकिन नगर निगम की मौजूदा 89 पार्किंगों में 22725 कारें ही खड़ी करने की व्यवस्था है। बाकी सभी कारें खाली मैदान, सड़क किनारे या फुटपाथ आदि जगहों पर खड़ी की जा रही हैं। यह समस्या बहुत विकराल हो चुकी है। यूटी सचिवालय की सड़क के दोनों ओर कारें खड़ी रहती हैं। सेक्टर-9सी की पार्किंग दिन में हमेशा फुल रहती है, जिसकी वजह से स्लिप रोड पर जाम लग जाता है। यही स्थिति, शहर के सभी मुख्य बाजारों का है।
अमर उजाला ने पाया कि पार्किंग ठेकेदारों व कर्मचारियों को सिर्फ पैसों से मतलब रह गया है। पार्किंग में जो जगह मोटरसाइकिल व साइकिल खड़ी करने के लिए मार्क की गई है, वहां भी पैसों के लिए कारों को खड़ा किया जा रहा है। कई बार लोग भी जानबूझ कर ऐसा करते हैं जबकि यह नियमों के खिलाफ है। सेक्टर-22, 19 व 18 की मार्केट के पास भी गाड़ियां सड़क पर खड़ी हो रही हैं। ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर खड़े होने वाले वाहनों पर रोजाना कार्रवाई करती है लेकिन इसके बाद भी अवैध पार्किंग की समस्या खत्म नहीं हो पा रही है।
पार्किंग में जगह ढूंढने में बर्बाद होता है समय
शहर की पार्किंग व्यवस्था पर दो महीने पहले रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा (राइट्स) ने सर्वे किया। स्टडी रिपोर्ट में राइट्स ने बताया कि शहर में 89 पार्किंग हैं, जिसमें 22725 कारों को खड़ा करने की व्यवस्था है लेकिन इनमें कई समस्याएं हैं। कोई रियल टाइम ट्रैकिंग सिस्टम नहीं है। जगह ढूंढने में काफी समय बर्बाद होता है। कई बार जाम भी लग जाता है। जगह का भी इस्तेमाल ठीक तरीके से नहीं किया जाता है। इससे प्रदूषण तो होता ही है, लोगों को भी काफी परेशानी होती है। राइट्स ने पार्किंग के दाम को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
ये दिए हैं सुझाव
- दिव्यांग, इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल, पिक एंड ड्रॉप को प्राथमिकता मिले
- व्यस्त समय के लिए पार्किंग का दाम अधिक और गैर-पीक घंटों के दौरान कम हो
- खाली जगहों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाए
- स्टाफ के लिए बस सेवा हो जिससे कि पार्किंग की मांग हो सके
- पार्किंग के प्रबंधन के लिए मोबाइल एप को लागू किया जाए- ई-वॉलेट, डेबिट और क्रेडिट कार्ड सहित मोबाइल से भुगतान की सुविधा मिले