छात्रा के शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन की तरफ से पिछले तीन दिनों से लगातार इसकी नियमित जांच की जा रही थी। इसके बाद सभी रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य होने के बाद परिजनों ने भी डिस्चार्ज किए जाने की मांग की। अस्पताल प्रशासन की ओर से तीन दिन के बाद पीड़िता को गुरुवार दोपहर को डिस्चार्ज किया गया।
दोपहर से शाम तक पीड़िता अपने घर में रही और इस अवधि में गांव की महिलाएं भी बड़ी संख्या में उससे मिलने पहुंच गई थी। इस दौरान सामान्यत: महिलाओं द्वारा उन पुरानी बातों का जिक्र किया गया, जिसके बाद पीड़िता को शाम के समय घबराहट महसूस होने लगी तो उसने परिजनों को अवगत कराते हुए कहा कि वह घर में असहज महसूस कर रही है और दोबारा अस्पताल जाने के लिए बोला। तत्पश्चात परिजनों ने मामले से पुन: अधिकारियों को अवगत कराया और उसको देर शाम पुन: अस्पताल में दाखिल करा दिया।
पीड़िता की लगातार तीन दिनों तक जांच की गई थी और अब वह फिजिकल रूप से बिल्कुल सही थी। परिजनों के अनुरोध पर ही हमने डिस्चार्ज किया था लेकिन उन्हें इस बात से भी अवगत करा दिया था कि कुछ भी परेशानी होने पर आप तुरंत वापस आ सकते हैं। अक्सर ऐसे मामलों में पीड़िता पर मानसिक रूप से बहुत असर पड़ता है। बच्ची की मनोस्थिति अभी घर लायक नहीं है। अब दोबारा से काउंसिलिंग की जाएगी और इसके लिए फिजिशियन के साथ महिला चिकित्सक व काउंसलर की ड्यूटी लगा दी गई है। - डॉ. एके सैनी, एसएमओ, नागरिक अस्पताल