रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि तेज रफ्तार और नियमों का पालन न करना भी हादसों का कारण बना। 2018 के दौरान दोपहिया वाहनों पर बिना हेलमेट 773 चालकों और 443 पिछली सीट पर बैठे व्यक्तियों की जान गई जबकि सीट बेल्ट के बिना 479 चालकों और 584 सवारियों की जान गई।
ओवर स्पीडिंग में 2540 लोगों की गई जान
पंजाब पुलिस द्वारा सड़क हादसों पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, 2018 के दौरान सूबे में हर रोज औसतन 13 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। इनमें 74 फीसदी मौतें राज्य में नेशनल और स्टेट हाईवे पर हुईं, जोकि राज्य में कुल सड़क हादसों का 5.8 फीसदी है। सड़क पर मौतों के मामले में रोपड़ पहले, फतेहगढ़ साहिब दूसरे और मोहाली तीसरे स्थान पर रहे, जहां मौतों की संख्या राज्य की सड़कों पर औसत मौतों से दोगुनी रही।
रिपोर्ट में यह बात साफ हो गई कि पंजाब में ओवर स्पीडिंग सड़क हादसों का मुख्य कारण है। 2018 के दौरान ओवर स्पीडिंग के चलते 2540 लोगों की मौत हुई जबकि ड्रंक एंड ड्राइव के मामलों में 85 लोग मौत का शिकार हुए। इसके अलावा, ऐसे सड़क हादसे जिनमें जानी नुकसान हुआ, के मामले में ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा 58 फीसदी हादसे दर्ज किए गए जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 42 फीसदी रहा। शहरी क्षोत्रों में यह संख्या 2017 के हादसों के मुकाबले 5 फीसदी ज्यादा रही।
पंजाब में 2018 के दौरान छोटे-बड़े और भयानक सड़क हादसों के मामले में लुधियाना (850) सबसे आगे रहा जबकि पटियाला (756) दूसरे और मोहाली (507) तीसरे स्थान पर रहे। सूबे के बाकी जिलों में साल सड़क हादसों की जिलेवार संख्या इस प्रकार रही- जालंधर (445), संगरूर (401), अमृतसर (334), बठिंडा (322), होशियारपुर (312), रोपड़ (290), गुरदासपुर (228), फतेहगढ़ साहिब (218), कपूरथला (203), मोगा (201), बरनाला (180), मानसा (162), फिरोजपुर (160), मुक्तसर साहिब (151), फाजिल्का (146), नवांशहर (140), पठानकोट (139), फरीदकोट (134), तरनतारन (132)।
वहीं सड़क हादसों में मौतों के मामले में रोपड़ (604) पहले, मानसा (467) दूसरे और कपूरथला (352) तीसरे स्थान पर रहे। बाकी जिलों में यह आंकड़ा इस प्रकार रहा- मोहाली (297), तरनतारन (273), संगरूर (271), जालंधर (249), मोगा (218), फतेहगढ़ साहिब (207), गुरदासपुर (187), लुधियाना (176), होशियारपुर (173), अमृतसर (167), फाजिल्का (142), बरनाला (136), फरीदकोट (126), बठिंडा और फिरोजपुर (119-119), मुक्तसर साहिब (116), नवांशहर (111), पटियाला (110) और पठानकोट (105)।
14 जिलों की सड़कों पर 391 ब्लैक स्पॉट की पहचान
पंजाब के 14 जिलों में प्रोजेक्ट वीजन जीरो के तहत 391 ब्लैक स्पॉट की पहचान की गई है। यह ऐसे स्पॉट हैं, जहां बीते तीन साल के दौरान 500 मीटर सड़क पर 5 भयानक सड़क हादसे या हादसों में 10 मौतें हुई हैं। इनमें 264 ब्लैक स्पॉट नेशनल हाईवे पर और 64 स्टेट हाईवे पर, 6 लिंग मार्गों पर, 54 म्युनिसिपल रोड पर और 3 ब्लैक स्पॉट अन्य सड़कों पर पाए गए हैं।
जिलों के हिसाब से, सबसे ज्यादा 92 ब्लैक स्पॉट मोहाली की सड़कों पर हैं जबकि लुधियाना पुलिस कमिश्नेरट (91) और पटियाला (55) तीसरे स्थान पर हैं। नवांशहर और जालंधर पुलिस कमिश्नरेट में 21-21 ब्लैक स्पॉट, अमृतसर में 23 और गुरदासपुर में 22 ब्लैक स्पॉट की पहचान की गई है। अन्य जिलों में यह संख्या 10 से कम है।