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सीएफएसएल रिपोर्ट में खुलासा, गुरप्रीत ने ही राहुल मेहता के किए थे फर्जी हस्ताक्षर

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चंडीगढ़। सेक्टर 37 स्थित करोड़ों की कोठी को हड़पने के लिए नकली राहुल मेहता बनकर आरोपी गुरप्रीत ने हस्ताक्षर किए थे। इसका खुलासा पुलिस की ओर से जिला अदालत में पेश की गई सीएफएसएल की जांच रिपोर्ट में हुआ है। शुक्र वार को सुनवाई के दौरान सरकारी वकील अशोक रोहिल्ला ने इस केस से संबंधित 7 सप्लीमेंट्री चालान भी पेश किए। एडीजे जगदीप सूद के छुट्टी पर होने के कारण यह सप्लीमेंट्री चालान ड्यूटी मजिस्ट्रेट, एडीजे मनीषा जैन की अदालत में पेश किया गया। अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी, जिसमें चार्ज फ्रेम हो सकते हैं।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, राहुल मेहता की संपत्ति को कब्जाने की नीयत से उसे उसकी कोठी में ही बंधक बनाकर रखा गया। बाद में उसे यातनाएं देकर गुजरात के एक आश्रम में छोड़ दिया गया। इधर, दावा किया गया कि राहुल मेहता ने कोठी उन्हें बेची थी जबकि गुरप्रीत को राहुल मेहता बनाकर एस्टेट ऑफिस में पेश किया था। उसने ही दस्तावेजों पर बतौर मालिक हस्ताक्षर किए थे। पुलिस ने आरोपियों के बैंक के चेक पर हुए हस्ताक्षर व अन्य दस्तावेजों पर किए हस्ताक्षरों की लिखावट का मिलान करने के लिए सीएफएसएल में जांच के लिए भेजी थी। यह रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसमें यह साबित हो गया है कि गुरप्रीत ने ही राहुल मेहता के नकली हस्ताक्षर किए थे। याद दिला दें कि इस केस में पांच आरोपी जमानत पर हैं और पांच जेल में। जमानत पर चल रहा सौरभ गुप्ता बीमार होने के कारण शुक्रवार को पेश नहीं हुआ।
सेक्टर-31 थाने के पूर्व एसएचओ राजदीप सिंह, सतपाल डागर, अरविंद सिंगला व अन्य आरोपी अदालत में पेश हुए। पीड़ित राहुल ने 164 के बयान में कहा था कि आरोपियों ने उसे नशे में चूर करके रखा। उसे जान से मारने की धमकियां देते थे।
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महाजन को हस्ताक्षर करवाने के बाद तुरंत भेजा जेल
मल्ली हत्याकांड के गवाह रोहित को धमकाने के मामले में आरोपी संजीव महाजन को भी शुक्रवार को जिला अदालत में पेश किया गया। हालांकि उसे ज्यादा देर तक नहीं रुकने दिया। उसके हस्ताक्षर कराए और वापस बुड़ैल जेल भेज दिया।
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