सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए पीजीआई के रिटायर्ड प्रोफेसरों की मदद लेने का प्रस्ताव आया है। इस बारे में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने विचार-विमर्श किया, लेकिन फिलहाल इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। पीजीआई के रिटायर्ड प्रोफेसर एसएम बोस ने बताया कि इस बारे में बातचीत चल रही है। जैसे ही बात फाइनल होगी, उस बारे में जानकारी दे दी जाएगी। बोस के साथ कई अन्य रिटायर्ड डाक्टर भी शामिल हैं, जो चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग को अपनी सेवाएं देना चाहते हैं।
हर साल एक लाख मरीजों का बोझ
पेरीफेरी में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों व डिस्पेंसरी में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। साल 2012-13 में जीएमएसएच-16 की कुल ओपीडी 655199 थी। जबकि 2013-14 में कुल ओपीडी की संख्या 705528 थी। इसी तरह से 2014-15 में ओपीडी की संख्या 801093 पहुंच गई। यदि स्वास्थ्य विभाग के सभी सेंटरों की कुल वार्षिक ओपीडी का आंकड़ा देखें तो हर साल एक लाख मरीजों का बोझ बढ़ रहा है।
एनएचआरएम के डाक्टरों से लेते हैं मदद
स्वास्थ्य विभाग डाक्टरों की कमी को एनएचआरएम के डाक्टरों से पूरी करते हैं, लेकिन एनएचआरएम में भी डाक्टरों की संख्या पूरी नहीं होती। उनकी कई पोस्टे खाली हैं। स्पेशलिस्ट डाक्टरों की स्वीकृत पोस्ट 56 है, जबकि सिर्फ 26 डाक्टर ही पोस्टेड हैं। इसी तरह से 82 मेडिकल आफिसर की पोस्ट स्वीकृत है, जबकि नियुक्ति 57 डाक्टरों की है। हालांकि रेग्यूलर पोस्ट पूरी हैं। उनमें किसी भी डाक्टर की कमी नहीं है।
सोलह वर्षों से लटकी है 63 डॉक्टरों की मंजूरी
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में 63 डॉक्टरों की मंजूरी 16 वर्षों से लटकी हुई है। ये सभी रेगुलर डॉक्टरों की पोस्ट है। वर्ष 1999 में डाक्टरों की भर्ती का प्रपोजल तैयार कर स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया था। उसके बाद से यहां के अधिकारी लगातार मंत्रालय के संपर्क में हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। इससे डॉक्टरों के साथ मरीजों की भी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।