जज नोट कांड मामले में वीरवार को रिटायर्ड जस्टिस निर्मल यादव समेत पांच आरोपी सीबीआई जज विमल कुमार की अदालत में पेश हुए।
भ्रष्टाचार के आरोप तय करने को लेकर हुई सुनवाई के दौरान निर्मल यादव के वकील विशाल गर्ग नरवाना ने कहा कि उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से खारिज रिव्यू पिटीशन के खिलाफ नौ दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लिटिगेशन पिटीशन दायर की है।
इस याचिका पर अभी सुनवाई होनी है। इस पर सीबीआई कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 जनवरी तक टाल दी।
अदालत में निर्मल यादव के वकील नरवाना ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में 17 दिसंबर 2013 से तीन जनवरी 2014 तक सर्दियों की छुट्टियां होंगी। इस कारण वहां उनके केस की सुनवाई में वक्त लगेगा।
बचाव पक्ष ने आरोप तय किए जाने पर रोक को लेकर चार हफ्ते का समय मांगा। सीबीआई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि क्यों न इस मामले में सीआरपीसी की धारा 294 के तहत कार्यवाही की जाए।
अदालत का सवाल था कि मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर बहस हो चुकी है। सीबीआई वकील अनुपम गुप्ता ने विरोध किया और कहा कि नैतिक तौर पर वे इसके पक्ष में नहीं है।
बचाव पक्ष को केस में अपने किसी भी दस्तावेजों को सही या गलत बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। आरोप तय किए जाने की स्टेज पर इस धारा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान निर्मल यादव, वकील संजीव बंसल, होटलियर रविंद्र भसीन, निर्मल सिंह और प्रापर्टी डीलर राजीव गुप्ता मौजूद थे।
ध्यान रहे कि जस्टिस निर्मल यादव ने सीबीआई अदालत द्वारा आरोप तय करने के फैसले पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी थी। हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।
विदेश जाने की मिली अनुमति
सीबीआई जज विमल कुमार की अदालत ने सुनवाई के दौरान सह आरोपी रविंदर भसीन की चीन और थाईलैंड जाने की अर्जी को मंजूर कर लिया।
वकील ने कहा कि रविंद्र भसीन को व्यापार के लिए 16 दिसंबर से 31 दिसंबर तक चीन और थाईलैंड की यात्रा पर जाना है। इस पर सीबीआई वकील अनुपम गुप्ता ने कोई एतराज नहीं जताया।
यह था मामला
दायर मामला 13 अगस्त 2008 का है। आरोप है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील संजीव बंसल ने अपने मुंशी प्रकाश राम को 15 लाख रुपये देकर जस्टिस निर्मल यादव के घर पहुंचाने के लिए कहा था। मुंशी प्रकाश राम गलती से रुपये लेकर जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गया था।
जस्टिस निर्मलजीत कौर के नौकर ने मामले की शिकायत पुलिस को दी। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर प्रकाश राम, संजीव बंसल और राजीव गुप्ता को दबोचा था।
मामले में जस्टिस निर्मल यादव का नाम सामने आने पर जांच सीबीआई के पास गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच कर निर्मल यादव पर केस चलाने की कानून मंत्री से अनुमति मांगी थी लेकिन उन्हें नहीं मिली थी।
04 मार्च 2011 को सीबीआई ने राष्ट्रपति से निर्मल यादव पर केस चलाने की परमीशन लेकर 25 पेजों की चार्जशीट सीबीआई अदालत में दायर की थी।
चार्जशीट दायर होने पर सीबीआई अदालत ने मामले में जस्टिस निर्मल यादव, संजीव बंसल, राजीव गुप्ता, निर्मल सिंह और रविंदर भसीन को मामले की कॉपी भेजी थी।