एचएसएससी की जेई सिविल की परीक्षा में ब्राह्मणों को लेकर विवादित सवाल पूछने के मामले की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस को सौंपने की तैयारी चल रही है। एडवोकेट जनरल वलदेव राज महाजन ने सरकार को रिटायर्ड जस्टिस दर्शन सिंह का नाम सुझाया है। सरकार ने एजी से मामले की जांच के लिए कानूनी राय मांगी थी, जिसे महाजन ने शुक्रवार को सरकार को सौंप दिया। आयोग के चेयरमैन का पद एक्ट के अनुसार अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर का है, इसलिए एसीएस अधिकारी भी जांच कर सकते हैं, लेकिन एजी ने किसी भी विवाद से बचने के लिए रिटायर्ड जस्टिस का ही नाम सुझाया है।
चूंकि, एसीएस स्तर के अधिकारी को जांच सौंपने पर विवाद खड़ा हो सकता है, साथ ही विपक्षी दल भी मुद्दा बना सकते हैं। इसे देखते हुए एजी ने सरकार को कानूनी राय में सभी पहलु स्पष्ट कर दिए हैं। अंतिम फैसला सरकार को करना है कि किसे जांच का जिम्मा सौंपे, लेकिन एजी की राय को अभी तक दरकिनार नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार सरकार जल्द ही जस्टिस दर्शन सिंह की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित कर सकती है।
विवादित सवाल पूछने को लेकर ब्राह्मणों की ओर से परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाली कंपनी, मुख्य परीक्षक व अरिहंत प्रकाशन लिमिटेड के खिलाफ दो जगह पंचकूला और जींद में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। सरकार की जांच और एफआईआर पर पुलिस कार्रवाई साथ-साथ चलेगी। सरकार विवाद को शांत करने के लिए वीरवार को आयोग के चेयरमैन को निलंबित करते हुए पद से हटा चुकी है। शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने दावा किया था कि पंचकूला में सरकार की ओर से एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। लेकिन, अब सरकार ने एफआईआर दर्ज कराने में खुद को पीछे कर ब्राह्मणों को आगे कर दिया है।