उन्होंने बताया कि दसवीं कक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों को चार विषयों के आधार पर ही आईटीआई, हॉस्पिटलिटी, पॉलीटेक्निक एवं अन्य कोर्सों में दाखिला मिलेगा। विद्यार्थी साइंस स्ट्रीम में भी वैकल्पिक दाखिला ले सकेगा। उचित समय पर परीक्षा का आयोजन होने पर उसे साइंस विषय में पास होना अनिवार्य होगा। यदि विद्यार्थी दसवीं की साइंस की परीक्षा में फेल हो जाता है तो ग्यारहवीं कक्षा की बिना साइंस संकाय वाली पढ़ाई जारी रख सकेगा।
अब प्राइवेट स्कूलों में खुल सकेगी एडमिन ब्रांच, टीचर नहीं आएंगे
प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में एडमिन ब्रांच खोलने के लिए सरकार ने अनुमति दे दी है। डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू एंड डिजास्टर मैनेजमेंट नए संदर्भ में सभी जिलों के उपायुक्तों, प्रशासनिक सचिवों और फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा को सर्कुलर जारी कर दिया है। स्कूलों के रखरखाव और प्रशासनिक कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने यह प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा था।
फेडरेशन का कहना था कि स्कूल भले ही बंद पड़े हैं। लेकिन सत्र शुरू होने के बाद से स्कूल के रखरखाव प्रशासनिक कार्य जैसे कि सैलरी बिल इत्यादि काम प्रभावित हो रहे हैं। सरकार में फेडरेशन की इस मांग पर विचार करते हुए उक्त आदेश दिया है। सरकार द्वारा जारी आदेशों के तहत प्राइवेट स्कूलों में प्रशासनिक ब्रांच खुल सकेगी। जहां एक प्राचार्य एक क्लर्क, एक कंप्यूटर ऑपरेटर, एक सेवादार, एक माली व एक बस ड्राइवर उपस्थित रहेगा। किसी भी स्कूल में कोई भी कर्मचारी 65 साल से अधिक उम्र न हो। कोई भी गर्भवती महिला भी स्कूल में उपस्थित नहीं होगी। साथ ही टीचर भी फिलहाल स्कूल नहीं आएंगे।
निजी स्कूलों में प्रिंसिपल समेत छह कर्मचारी ही आएंगे
हरियाणा सरकार ने निजी स्कूलों को प्रशासनिक कार्यालय खोलने की अनुमति देने के साथ ही कड़ी हिदायतें भी जारी की हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन ने बताया कि जरूरी कार्यों के लिए प्रत्येक निजी स्कूल में प्रधानाचार्य, एक क्लर्क, एक कंप्यूटर ऑपरेटर, एक सेवादार, एक माली और एक बस ड्राइवर को ही स्कूल परिसर में उपस्थित होने की अनुमति है। 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को स्कूल नहीं बुलाया जाएगा। लॉकडाउन के कारण स्कूलों को प्रशासनिक, दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को पूरा करने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।