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चंडीगढ़: कोरोना मरीजों की रिकवरी अच्छी, सिर्फ गंभीर मरीजों को देनी पड़ी दवा

Sun, 10 May 2020 04:41 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो
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भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हर तीन में से एक पॉजिटिव मरीज कोरोना मुक्त हो चुका है। भारत का रिकवरी रेट करीब 30 फीसदी के करीब पहुंच चुका है। बच्चा हो या बूढ़ा, अधिकतर मरीज ठीक होकर जा रहे हैं। पीजीआई में भी दाखिल अब तक 20 मरीज ठीक होकर वापस जा चुके हैं। आने वाले समय में कई और मरीजों को छुट्टी मिलने वाली है। यह स्थिति तब है, जब इसकी कोई दवा तैयार नहीं हुई है। अब सवाल यह उठता है कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए अब तक कोई दवा उपलब्ध नहीं है तो फिर लोग ठीक कैसे हो रहे हैं?

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पीजीआई के मुताबिक, वह भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक इलाज कर रहा है। लक्षण के हिसाब से मरीजों का इलाज किया जाता है। हल्के लक्षण होने पर कैसा इलाज करना है और गंभीर लक्षण होने पर कैसी दवाएं देनी हैं। इसके पैरामीटर भी तय किए गए हैं। दवाओं की मात्रा और कौन सी दवा किस मरीज पर इस्तेमाल की जा सकती है। इसके लिए भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टर किसी भी मरीज को अपने मन मुताबिक दवाएं नहीं दे सकते।

निगरानी और जांच सबसे अहम
पीजीआई के एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तनबीर समारा ने बताया कि पाजिटिव मरीजों के इलाज में सबसे अहम निगरानी और जांच है। जब कोई मरीज आता है तो सबसे पहले उसके लक्षण देखे जाते हैं। यदि लक्षण नहीं है तो फिलहाल उसे दवा नहीं देते। हल्का खाना-पीना, एक्सरसाइज करवाई जाती है। 
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मध्यम लक्षण वाले मरीज जिनमें खांसी, जुकाम या ब्लड प्रेशर घट-बढ़ रहा होता है, उनमें साधारण फ्लू की दवा और इंट्रावेनस ड्रिप लगाए जाते हैं। यदि दर्द है तो साधारण पेन किलर भी देने का प्रावधान है। लेकिन इन मरीजों की रोजाना जांच होती है। ऑक्सीजन का स्तर चेक किया जाता है। हर मरीज का एक्सरे करते हैं, ताकि इंफेक्शन का पता चल सके।

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गंभीर मरीजों का इलाज

जिन मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है और जिनमें जान जाने का खतरा हो, उन्हें तुरंत आईसीयू में दाखिल करने के निर्देश हैं। ऐसे मरीजों को आईसीयू मैनेजमेंट के साथ दो दवाइयां भारत सरकार के निर्देश पर दिया जाना है। इनमें एक दवा हाइड्राक्सीक्लोरोक्वीन और दूसरी एजिथ्रोमाइसीन है, लेकिन इसके साथ यह भी कहा गया है कि इन दवाओं के देने के साथ मरीजों की खास निगरानी रखनी है। 12 साल की उम्र से छोटे बच्चों, गर्भवती और स्तनपान करने वाली महिलाओं को दवा नहीं देने के निर्देश हैं।

कई ऐसे होंगे, जो पॉजिटिव हुए और ठीक भी हो गए होंगे
पीजीआई के पल्मोनेरी डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी एसके जिंदल ने बताया कि इस फ्लू से ज्यादा घबराने की आवश्यकता नहीं है। वायरस नया है, इसलिए इम्युनिटी फाइट नहीं कर पा रही। 100 में से सिर्फ तीन लोगों की मौत होती है। 80-85 मरीजों को अस्पताल में दाखिल होने की आवश्यकता नहीं है। 

15 मरीजों को दाखिल करने की आवश्यकता होती है। इनमें से भी 10-12 मरीज रिकवर कर जाते हैं। ऐसे कई मरीज होंगे, जो पॉजिटिव हुए और ठीक भी हो चुके होंगे। सिर्फ दो बातों का ध्यान रखें। पहला बचाव और दूसरा हेल्दी डाइट लेते रहे।
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