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दुष्प्रभाव: मोबाइल फेस सिंड्रोम से चेहरे पर आ रहे दाग, व्हाट्सएप सिंड्रोम उंगलियों की कोशिकाओं को कर रहा प्रभावित

Fri, 03 Dec 2021 12:20 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

व्हाट्सअप के ज्यादा प्रयोग से उंगलियों की त्वचा पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है, जिसे व्हाटसपटाइटिस नाम दिया गया है। वहीं युवा और बच्चे लैपटॉप को अपनी जांघ पर रखकर घंटों काम करते हैं या गेम खेलते हैं। लैपटॉप से निकलने वाली गर्म ऊर्जा उन्हें इरीदिमाएपिग्नी नामक बीमारी दे रही है।
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मोबाइल लैपटाप का ज्यादा इस्तेमाल सेहत पर पड़ रहा भारी। - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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अगर आप कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप और टीवी पर देर तक चिपके रहते हैं तो सावधान हो जाइए। इसके दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। यह आंखों के साथ ही चेहरे की रंगत भी कमजोर कर रहा है। इनसे निकलने वाली नीली किरणें चेहरे को काला कर रही हैं।

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इस शोध से भी साबित हो चुका है कि नीली किरणों का दुष्प्रभाव चेहरों पर कालापन और अनचाहे दाग ला सकता है। यानी जो लोग धूप में कम निकलते हैं, उन्हें मोबाइल और लैपटॉप घर पर ही अनचाहे दाग, कालेपन और झुर्रियों का शिकार बना रहा है। इसे लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं, क्योंकि ट्राइसिटी में भी इसके मरीज मिलने लगे हैं। उन मरीजों की केस स्टडी अमेरिकन डर्मोटोलॉजी जरनल में पंजीकृत हुआ है। 

नेशनल स्किन हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. विकास शर्मा का कहना है कि इस समस्या को समय रहते रोकना बहुत जरूरी है, क्योंकि इसके दुष्प्रभाव को दूर करने में काफी मुश्किल आती है। इलाज के बाद भी यह पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाता। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए कंपनियां नीली किरणों से बचाव के लिए इनडोर सनस्क्रीन का भी उत्पादन करने में लगी हैं। पीजीआई के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण नारंग का कहना है कि कंप्यूटर और मोबाइल जैसे अन्य गैजेट से निकलने वाली नीली किरणों के दुष्प्रभाव को लेकर विश्वभर में चर्चा हो रही है।शोध से भी साबित हो चुका है कि नीली किरणें आंखों के साथ ही त्वचा पर भी दुष्प्रभाव डालती हैं। 

मोबाइल और स्मार्ट फोन से जरा बचके

मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा प्रयोग से गर्दन और चेहरे पर आने वाले बदलाव को लेकर डॉ. विकास शर्मा का शोध अमेरिकन डर्मोटोलॉजिस्ट एसोसिएशन के जरनल में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने बताया कि लगातार नीली किरणों के संपर्क में आने से गर्दन के आसपास और चेहरे पर अनचाहे दाग, कालापन और तिल होने का केस रिपोर्ट हुआ है। इसलिए इससे बचाव के उपायों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। 

उंगलियों और जांघ को भी बांट रहा मर्ज 

डॉ. विकास ने बताया कि व्हाट्सअप के ज्यादा प्रयोग से उंगलियों की त्वचा पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है, जिसे व्हाटसपटाइटिस नाम दिया गया है। ट्राइसिटी से इसके भी दो केस जरनल में रिपोर्ट हुए हैं। दूसरी तरफ युवा और बच्चे लैपटॉप को अपनी जांघ पर रखकर घंटों काम करते हैं या गेम खेलते हैं। लैपटॉप से निकलने वाली गर्म ऊर्जा उन्हें इरीदिमाएपिग्नी नामक बीमारी दे रही है। इसे लैपटाप थाई सिंड्रोम का नाम दिया गया है जिससे उन्हें जांघ पर कई तरह की परेशानी हो रही है। ये गर्म ऊर्जा खून की नलियां क्षतिग्रस्त कर सकती हैं। इससे जांघों (थाई) पर लाल और कालापन लिए हुए जालीनुमा दाग बन जाता है। खून की कोशिकाओं के एक बार क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद इसे ठीक करना बहुत मुश्किल है। इसलिए इसे लेकर सचेत रहने की जरूरत है। 

ऐसे करें बचाव 

  • टीवी, मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट का प्रयोग एक उचित दूरी से ही करें
  • इनमें रंगों को बहुत ज्यादा करने की बजाय ब्राइटनेस रखें, ताकि नीली किरणें कम से कम निकले
  • 15 से 20 मिनट के बाद दो से तीन मिनट का ब्रेक लेते रहें
  • घर के अंदर भी सनस्क्रीन का प्रयोग करें
  • सामान्य रेंज की बजाय विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उन्नत नैनो-कणों के साथ नए व्यापक स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का उपयोग करें
  • कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और टैबलेट पर ब्लू लाइट स्क्रीन प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करें
  • मोबाइल फोन या लैपटॉप के मामले में नाइट मोड चालू करें
  • आहार में विटामिन सी वाले फलों की मात्रा बढ़ा दें

आधुनिक तकनीक को लेकर हम उसके प्रयोग की समय सीमा जैसे मुख्य पहलुओं को नजरअंदाज करने लगे हैं। किसी भी चीज की अधिकता ही दुष्प्रभाव को उत्पन्न करती है। स्मार्ट फोन फेस, इरीदिमाएपिग्न और व्हाटसपटाइटिस इस अधिकता का ही परिणाम है, जो धीरे-धीरे सामने आने लगा है।  -डॉ. विकास शर्मा, त्वचा रोग विशेषज्ञ

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