चंडीगढ़। पीजीआई में चिकित्सा शोध गतिविधियों को लगातार नई गति मिल रही है। संस्थान में चल रहे एक्स्ट्राम्यूरल रिसर्च प्रोजेक्ट्स की संख्या वर्ष 2025-26 में बढ़कर 827 तक पहुंच गई है जबकि 2024-25 में यह संख्या 573 थी। इसके साथ ही बाहरी एजेंसियों से मिलने वाली रिसर्च फंडिंग भी लगातार बढ़ रही है और इस वर्ष अब तक करीब 143 करोड़ रुपये की ग्रांट प्राप्त हो चुकी है।
रिसर्च डे पर संस्थान की इन उपलब्धियों को साझा किया गया। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में पीजीआई को करीब 92 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली थी, जो 2024-25 में बढ़कर 129 करोड़ रुपये हो गई। इसके अलावा संस्थान में इस समय 101 इंट्राम्यूरल रिसर्च प्रोजेक्ट भी विभिन्न विभागों में चल रहे हैं, जिनके जरिए नई चिकित्सा तकनीकों और उपचार पद्धतियों पर काम किया जा रहा है। पीजीआई के कई फैकल्टी सदस्य रिसर्च प्रोजेक्ट्स में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इनमें स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रो. शंकर प्रिंजा, एंडोक्रिनोलॉजी के प्रो. संजय कुमार भदादा, न्यूरोलॉजी के प्रो. धीरज खुराना, डर्मेटोलॉजी के प्रो. दविंदर प्रसाद और प्रो. मधु गुप्ता शामिल हैं। कार्यक्रम में उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए कई फैकल्टी को सम्मानित भी किया गया। हेपेटोलॉजी विभाग के प्रो. अजय दुसेजा, कम्युनिटी मेडिसिन के प्रो. सोनू गोयल और प्रो. रविंद्र खैवाल को उनके शोध कार्यों के लिए सम्मान मिला। वहीं पब्लिकेशन के मामले में भी पीजीआई के वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।