मेयर का कार्यकाल पांच साल, निगम के राजस्व, सिटको के होटल पीपीपी मोड पर चलाने सहित अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने सोमवार को नए मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद के साथ बैठक की। बैठक में मुख्य सचिव ने 15 दिनों में प्रशासन के सभी विभागों के साथ की रिव्यू मीटिंग के आधार पर तैयार रिपोर्ट प्रशासक को सौंपी। मुख्य सचिव ने प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को अपनी रिपोर्ट में विशेष तौर पर हाउसिंग स्कीम, एस्टेट ऑफिस, मेट्रो प्रोजेक्ट, ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म, ट्रैफिक और पार्किंग जैसी समस्या पर विशेष तौर पर अहम बिंदुओं पर चर्चा की। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुख्य सचिव ने प्रशासक को मेट्रो प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने, इंडस्टि्रयल एरिया फेज-3 में सिफ्ट सिटी, सेक्टर-53-54 में नई हाउसिंग स्कीम लॉन्च करने सहित कई पब्लिक डीलिंग सर्विसेज और ई-ऑफिस को खासकर एक नवंबर से हर हाल में लागू करने के उठाए जा रहे कदमों के बारे में विस्तार से प्लान रखा।
इस दौरान मुख्य सचिव ने प्रशासक से नगर निगम के राजस्व, सिटको के होटल पीपीपी मोड पर चलाने सहित अन्य विषयों पर भी चर्चा की। सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ के मेयर के कार्यकाल पर समय-समय पर सामने आये प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इनके अलावा शहर को एजुकेशन हब के रूप में डेवलप करने पर नए प्लान बनाने के लिए भी खाका पेश किया गया।
गृह मंत्रालय के साथ होने वाली बैठक टली
बीते सप्ताह चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों की केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ पांच अहम मुद्दों पर बैठक होनी थी जो टल गई। प्रशासक के साथ नए मुख्य सचिव की हुई बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि प्रशासन की ओर से पहले ही गृहमंत्रालय को लिखकर इन मुद्दों के बारे में राय स्पष्ट कर दी गई थी लेकिन सांसद मनीष तिवारी के सदन में इन मुद्दों पर सवाल उठाए जाने के बाद गृह मंत्रालय ने अधिकारियों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए थे। शहर में लाल डोरा, मालिकाना हक, शेयर-वाइज बिक्री और ग्रुप हाउसिंग जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ बैठक की जल्द ही नई तारीख तय होगी। सूत्रों के अनुसार इससे पहले प्रशासक कटारिया ने मुख्य सचिव के साथ उस रिपोर्ट पर भी चर्चा की जो गृह मंत्रालय के समक्ष रखी जानी है। मंत्रालय ने जिन पांच विषयों पर रिपोर्ट मांगी थी उनमें सेक्टरों में शेयर-वाइज बिक्री और अपार्टमेंटलाइजेशन, पुनर्वास कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक, लाल डोरा विस्तार और 22 गांवों से जुड़े मुद्दे, हाउसिंग बोर्ड के मकानों में नीड-बेस्ड चेंज की मांग और ग्रुप हाउसिंग व को-ऑपरेटिव सोसाइटियों से जुड़े मामले शामिल हैं।