फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अस्पताल के बरामदे में महिला की डिलीवरी

Sun, 31 Aug 2014 11:59 AM IST
ब्यूरा/अमर उजाला/ यमुनानगर
विज्ञापन
विज्ञापन
सिविल अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण एक महिला को खुले आसमान के नीचे ही बच्ची को जन्म देना पड़ा। जच्चा का आरोप है कि शनिवार को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन नर्सों ने उन्हें लेबर रूम से बाहर कर दिया।
विज्ञापन


इसी दौरान उठी प्रसव के कारण महिला को सिविल अस्पताल के बेड़े में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। खुले में डिलीवरी का पता चलता ही नर्स और चिकित्सकों में हड़कंप मच गया और जच्चा-बच्चा की जांच के बाद उन्हें बेड दिया गया। वहीं मामले में अस्पताल के आला अधिकारी विभागीय जांच की बात कर रहे हैं।

उत्तरप्रदेश के बदायूं के गांव अजनावर गांव निवासी 27 वर्षीय मीना ने बताया कि वह यमुनानगर के दामला में सपरिवार रहती है और सड़क निर्माण का कार्य करती है। शनिवार सुबह उसे प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन उसे सिविल अस्पताल ले आए।
विज्ञापन


परिजन जब उसे लेकर लेबर रूम पहुंचे तो वह तैनात महिला नर्स ने उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया। अमरपाल ने बताया कि उसकी पत्नी मीना दर्द से कराह रही थी। बावजूद इसके नर्स ने उन्हें जबरन बाहर कर दिया। इस दौरान उसने पत्नी को लेबर रूम के बेडे़ में बने बैंच पर बैठा दिया और मदद के लिए चिकित्सक के पास चला गया। इस दौरान मीना की प्रसव पीड़ा बढ़ गई और उसने वहीं एक बच्ची को जन्म दिया।

महिला की बेड़े में डिलीवरी होने का पता लगते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आननफानन में चिकित्सकों और नर्सों ने जच्चा-बच्चा को वार्ड में दाखिल कर लिया। दोनों की जांच के बाद चिकित्सकों ने महिला को दवाइयां आदि उपलब्ध करवाई।

अनजान महिला ने दिया साथ
मीना ने बताया कि उसके साथ गांव की एक महिला आई थी। प्रसव के समय जब कोई चिकित्सक और नर्स सामने नहीं आई तो उसने वहीं बैठी एक अन्य महिला की सहायता ली। मीना ने बताया कि दोनों की मदद से उसने बच्ची को जन्म दिया। मीना का कहना है कि यदि वे महिलाएं न होती तो न जाने क्या होता।

जच्चा में पाई गई खून की कमी
डिलीवर के बाद चिकित्सकों ने जच्चा-बच्चा को महिला वार्ड में शिफ्ट कर दिया। बताया जाता है चिकित्सीय जांच में महिला के शरीर में खून की बेहद कमी पाई गई। महिला में सिर्फ 6 से 7 ग्राम ही खून थी। इसके बाद चिकित्सकों ने उसे खून चढ़ाया। जिस प्रकार महिला में खून की कमी पाई गई है और प्रसव के समय कोई चिकित्सक और नर्स उसके साथ न थी तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें