चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार से 50 फीसदी क्षमता के साथ ओपीडी सेवा बहाल कर दी है। जीएमएसएच-16 समेत शहर के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर आए मरीजों का मौके पर पंजीकरण कर परामर्श दिया गया। हालांकि, बरसात के कारण सामान्य दिनों की अपेक्षा मरीजों की संख्या काफी कम रही।
बता दें कि कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के चलते 10 जनवरी से पीजीआई, जीएमसीएच 32 व जीएमएसएच 16 की फिजिकल ओपीडी बंद कर दी गई थी। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह ने बताया कि जितने भी मरीज इलाज कराने आए थे, उन सभी का मौके पर पंजीकरण कर उन्हें परामर्श दिया गया। उन्होंने लोगों से अपील की कि जब तक बहुत जरूरी न हो अस्पताल न आएं। ई-संजीवनी व टेलीकंसल्टेंशन के माध्यम से ही घर पर रहकर संबंधित डॉक्टर से परामर्श लें। क्योंकि संक्रमण का खतरा अभी टला नहीं है।
वहीं, दूसरी ओर पीजीआई व जीएमसीएच 32 में ऑन द स्पॉट पंजीकरण के बजाय टेलीकंसल्टेशन से ही मरीजों को परामर्श दिया गया। हालांकि, प्रशासन के निर्देशानुसार मरीजों की संख्या में इजाफा कर दिया गया है। शुक्रवार को जीएमसीएच 32 में 600 और पीजीआई में लगभग 3500 मरीजों को परामर्श दिया गया।
जीएमसीएच-32 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर गर्ग का कहना है कि संक्रमण की स्थिति को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे ऑन द स्पॉट पंजीकरण की सुविधा भी बहाल की जाएगी। फिलहाल, प्रति डॉक्टर मरीजों की संख्या दोगुनी कर दी गई है। जो डॉक्टर एक दिन में 4 मरीजों को परामर्श दे रहे थे, उन्हें 8 मरीजों को परामर्श देने का निर्देश दिया गया है। वहीं, पीजीआई प्रशासन का कहना है कि ओपीडी में मरीजों की संख्या 4000 से बढ़ाकर 6000 कर दी गई है। फिलहाल, टेलीकंसल्टेशन व ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से ही मरीजों को परामर्श दिया जाएगा। मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पंजीकरण का निर्देश दिया गया है। जरूरत के हिसाब से मरीजों को फिजिकल ओपीडी में भी बुलाया जा रहा है। जल्द ही ऑन द स्पॉट पंजीकरण संबंधी निर्णय भी लिया जाएगा।