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गुड न्यूज, पक्के हो सकते हैं 30 हजार कर्मचारी

Sun, 01 Jun 2014 10:55 AM IST
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एप्रूव्ड एजेंसी की श्रेणी में चूंकि हरट्रान भी आता है और विभागों, बोर्डों, निगमों में कंप्यूटर आपरेटर हरट्रान के जरिए रखे गए थे। इसलिए तीन साल की सेवा वाले इन कंप्यूटर आपरेटरों को रेगुलर होने का लाभ मिल सकता है।
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एप्रूव्ड एजेंसी की श्रेणी में विभागीय चयन समिति भी आती है। कर्मचारी चयन आयोग, शिक्षक भर्ती बोर्ड, पुलिस भर्ती बोर्ड के जरिए भी रेगुलर कर्मचारी रखे जाते हैं।

इसके अलावा सरकार ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए भी कांट्रैक्ट पर कच्चे कर्मचारी रखे हुए हैं। अगर आउटसोर्सिंग एजेंसी को भी एप्रूव्ड एजेंसी की श्रेणी में माना गया तो 30000 से 32000 कच्चे कर्मचारी रेगुलर हो सकते हैं।
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ये कहना है कर्मचारी संघ के महासचिव का

अगर सरकार ने सिर्फ हरट्रान को एप्रूव्ड एजेंसी माना तो मंत्रिमंडल की मंजूर नीति से सिर्फ ढाई हजार कच्चे कर्मचारी रेगुलर हो सकेंगे। इसके अतिरिक्त पुरानी नीतियों से बचे करीब एक हजार कच्चे कर्मचारी रेगुलर हो सकेंगे। हम आउटसोर्सिंग एजेंसी को भी एप्रूव्ड एजेंसी मानते हैं। अगर सरकार ने भी उन्हें एप्रूव्ड एजेंसी माना तो करीब 25000 कच्चे कर्मचारी पक्के हो सकते हैं।
सुभाष लांबा, महासचिव, सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा

सरकार ने उदारता से रेगुलराइजेशन पालिसी तैयार की है। इससे 30000 से 32000 कच्चे कर्मचारियों को पक्का होने का लाभ मिलेगा। कर्मचारियों को एसीपी का लाभ दिया है उससे करीब एक लाख रेगुलर कर्मचारियों को लाभ होगा।
प्रो. वीरेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार

सैद्धांतिक मंजूरी के बाद तैयार हो रही है पॉलिसी

हरियाणा मंत्रिमंडल ने 28 मई को पंजाब की रेगुलराइजेशन पॉलिसी की तर्ज पर अपनी पॉलिसी बनाने की मंजूरी दी है। उसमें थोड़ा-सा बदलाव कर एप्रूव्ड (अनुमोदित) एजेंसी के जरिए भर्ती हुए कच्चे कर्मचारियों को भी रेगुलर होने का लाभ मिल सकता है।

मंत्रिमंडल की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद मुख्य सचिव कार्यालय रेगुलराइजेशन पॉलिसी तैयार कर रहा है। सरकारी सूत्रों का दावा है कि इस रेगुलराइजेशन पालिसी से ग्रुप बी, सी और डी के 30000 से 32000 कच्चे कर्मचारियों को पक्का होने का लाभ मिल सकता है।
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एप्रूव्ड एजेंसी से भर्ती हुए कच्चे कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ

एक अधिकारी ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि रेगुलराइजेशन पालिसी का मतलब ही ज्यादा से ज्यादा कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का लाभ देना है।

इसलिए मंत्रिमंडल ने मंजूरी में लिखा है, ‘28 मई, 2014 को कांट्रैक्ट आधार पर कार्यरत तीन साल की सेवा वाले कर्मचारियों को रेगुलर किया जाएगा, जिन्हें सरकार/एप्रूव्ड एजेंसी द्वारा काम पर रखा गया है।

जिस पद पर कर्मचारी को रेगुलर किया जाएगा वह पद उस कर्मचारी के काम पर रखे जाने वाले दिन रिक्त हो और रेगुलर किए जाने वाले दिन भी रिक्त हो।’

इसके अलावा सी और डी ग्रुप के जो कच्चे कर्मचारी 17 जून, 1997, 5 नवंबर 1999, एक अक्तूबर 2003 और 10 फरवरी 2004 की रेगुलराइजेशन पालिसी के तहत रेगुलर होने से वंचित रह गए थे, उन्हें भी रेगुलर किया जाएगा।
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