-उच्चस्तरीय बैठक में सहमति बनने के बाद भी लागू नहीं हुआ आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के 36 आरोही मॉडल स्कूलों में कार्यरत सैकड़ों शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों का भविष्य पिछले सात वर्षों से अधर में लटका हुआ है। 2011 में शुरू हुए इन स्कूलों में 2232 पदों पर नियुक्त कर्मचारियों को पांच वर्ष की सेवा पूरी करने पर नियमित करने का प्रावधान था। इसके अतिरिक्त, उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह समान वेतनमान और अन्य भत्तों का भी आश्वासन दिया गया था। लेकिन, वर्षों बाद भी ये वादे अधूरे हैं और कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। आरोही मॉडल स्कूल स्टाफ एसोसिएशन हरियाणा के प्रधान मनोज कुमार ने शिक्षामंत्री से मांग की है कि इस मामले को प्रमुखता के साथ पूरा किया जाए।
आरोही मॉडल स्कूलों की शुरुआत 2011 में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की थी। इन स्कूलों में प्राचार्य, प्राध्यापक, और लाइब्रेरियन के पदों पर 2012 में उच्च मापदंडों के साथ योग्य शिक्षकों को नियुक्त किया गया। उनसे वादा किया गया था कि पांच साल की संतोषजनक सेवा के बाद उन्हें नियमित किया जाएगा, परंतु 2018 में सेवा अवधि पूरी होने के बावजूद नियमितीकरण की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। पांच साल की सेवा पूरी करने के बाद, 5 फरवरी 2018 को शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, अक्तूबर 2018 में फिर से दस्तावेजों की मांग की गई। 21 जुलाई 2023 को तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (विद्यालय शिक्षा) राजेश खुल्लर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में नियमितीकरण के प्रस्ताव पर सहमति दी गई। निर्णय लिया गया कि प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। लेकिन अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पत्र जारी नहीं हुआ है।
इस बीच, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) द्वारा पीजीटी पदों पर नई भर्ती की घोषणा के बाद, आरोही मॉडल स्कूलों के कई शिक्षकों ने अन्य स्थानों पर चयनित होकर इस्तीफा दे दिया। इसे देखते हुए, 4 दिसंबर 2018 को शिक्षा विभाग ने एक बार फिर आदेश जारी कर पांच वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया, जिससे कई शिक्षकों ने अपने इस्तीफे वापस ले लिए।