आज शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कर सकते हैं घोषणा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद हरियाणा सरकार एक के बाद एक लोगों को साधने के लिए फैसले ले रही हैं। ग्रामीणों के लिए पंचायती राज संस्थाओं में कुछ अहम बदलाव के बाद अब शहरी लोगों को राहत देने की तैयारी है। शहरी स्थानीय निकायों में लोगों को आ रही दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने कुछ अहम फैसले लिए हैं। रजिस्ट्री के लिए निकायों से एनडीसी लेने को सरलीकरण किया जा रहा है, जबकि निकाय क्षेत्र में भविष्य में एक एकड़ तक भूमि की रजिस्ट्री हो सकेगी। साथ ही 500 गज के भूखंडों की टुकड़ों में 100 से 50 गज तक रजिस्ट्री हो सकेगी। इनके अलावा, निकायों के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन को भी वित्तीय शक्तियां बढ़ाई जानी है। अवैध काॅलोनियों को वैध करने के लिए 30 जून तक आवेदन की तिथि बढ़ाई जानी है। इन तमाम फैसलों की आधिकारिक घोषणा वीरवार को शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री सुभाष सुधा करेंगे।
इस संबंध में बुधवार को निकाय मंत्री ने विभाग के अधिकारियों के साथ लंबी मंत्रणा की। बैठक में निकाय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। बैठक में लोगों को आ रही दिक्कतों को लेकर फीडबैक लिया गया। बैठक में सामने आया कि एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) को लेकर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार चल रहा है और इसके बिना लोगों की रजिस्ट्री नहीं हो रही हैं। दूसरा, शहरी क्षेत्र में एक एकड़ तक रजिस्ट्री बंद की हुई है, इससे लोगों को रिहायसी मकान बनाने आदि में दिक्कतें आ रही हैं। साथ ही पहले से मौजूद 1000 और 500 गजों के भूखंडों को टूकड़ों में करके बेचने और खरीदने में लोगों की दिक्कतें आ रही हैं। इसलिए सरकार इसमें राहत देते हुए एक एकड़ तक की रजिस्ट्री कराने और 50 गज तक भूखंड़ों के टूकड़े करके बेचने का प्रावधान करने जा रही है।
जन प्रतिनिधियों की बढ़ेंगी शक्तियां
सरकार ने निकाय संस्थाओं के प्रधान और उपप्रधान की शक्तियां बढ़ाने का फैसला लिया है। निकायों में सबसे ज्यादा परेशानी वित्तीय पावर को लेकर है। माना जाता है कि सचिव की ओर से बिल पास करने को लेकर मनमानी की जाती थी। लिहाजा अब सरकार की योजना है कि चेयरमैन, वाइस चेयरमैन या फिर सचिव में किसी दो के हस्ताक्षर होने पर चेक मान्य होगा।
एनडीसी का होगा सरलीकरण
शहरी क्षेत्रों में अनापत्ति प्रमाण-पत्र (नो-ड्यूट सर्टिफिकेट) का सरलीकरण किया जाना है। नए प्रारूप के तहत निकायों द्वारा निर्धारित किए दस्तावेजों की जांच के बाद तुरंत ही एनडीसी दी जाएगी। इनमें प्रापर्टी आईडी और हाउस टैक्स दस्तावेज प्रमुख रूप से मान्य होंगे। उनके आधार पर तुरंत ही एनडीसी दी जाएगी, इसके बाद रजिस्ट्री करना राजस्व विभाग का काम होगा।