सीआईए ने वारदात सुलझाने में वाहवाही लूटने के लिए कहानी गढ़ी, लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान उसका भांडाफोड़ हो गया।
जो देसी कट्टा पुलिस पहले ही किसी अन्य आरोपी से रिकवर दिखा चुकी थी, उसी कट्टे को बाद में पकड़े गए दो आरोपियों से रिकवर दिखा दिया।
आरोपी चंडीगढ़ के एक अस्पताल में अपने पिता का इलाज करा रहा था, लेकिन उसे हरिद्वार से गिरफ्तार दिखाया गया।
बचाव पक्ष ने इन तमाम झूठी कहानी को कोर्ट में साबित कर दिया और कोर्ट ने लूट की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार दो आरोपियों को बरी कर दिया।
यह करतूत तत्कालीन सीआईए प्रभारी इंस्पेक्टर चतर सिंह की तैनाती के दौरान हुई थी और अप्रैल 2013 में दो युवकों को लूट की योजना बनाने के आरोप में पकड़ा गया था।
इससे पहले भी कोर्ट से ऐसे मामलों में आरोपी बरी हो चुके हैं, क्योंकि पुलिस की कहानी कोर्ट में साबित नहीं हो पाई थी।
बचाव पक्ष के वकील दिव्या प्रताप व दीपक कौशल ने बताया कि सीआईए ने शंकर दास और लाल सिंह को इंडस्ट्रियल एरिया में एक कंपनी के मैनेजर को लूटने की योजना बनाने के आरोप में पकड़ा था।
साथ ही उनसे एक देसी कट्टा व चाकू रिकवर दिखाया था। अब कोर्ट में साबित हुआ कि यही देसी कट्टा अन्य केस में रिकवर दिखाया गया था। उस केस की सर्टिफाइड प्रतियां भी कोर्ट में दी गईं।
साथ ही कोर्ट में यह भी साबित हो गया कि शंकर दास चंडीगढ़ के अस्पताल में अपने पिता की देखभाल में व्यस्त था।
जिस दिन उसे गिरफ्तार दिखाया गया, उस दिन अस्पताल रिकॉर्ड में वह अपने पिता को डिस्चार्ज करा रहा था।
इतना ही नहीं, पुलिस कोर्ट में यह भी बयां नहीं कर पाई कि लूट किस कंपनी के मैनेजर के साथ होनी थी? केस में ऐसी लापरवाहियों के चलते कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।