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भाजपा चंडीगढ़ में फिर उभरी गुटबाजी, मेयर के उम्मीदवार के खिलाफ टंडन ग्रुप ने भरा परचा

Tue, 26 Jun 2018 11:56 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ बीजेपी, संजय टंडन
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बीजेपी चंडीगढ़ में गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही। आलम ये है कि मेयर के उम्मीदवार दलीप शर्मा को चुनौती देते हुए टंडन ग्रुप ने नामांकन करा दिया है। मेयर देवेश मोदगिल ने अतिक्रमण हटाओ कमेटी के प्रस्तावित चेयरमैन के लिए निर्दलीय पार्षद दलीप शर्मा को उम्मीदवार बनाया था। सोमवार को नगर निगम की 14 सब कमेटियों के लिए नामांकन भरे गए। बाकी सभी 13 सब कमेटियों के चेयरमैन सर्वसम्मति से चुन लिए गए हैं। इन सभी सब कमेटियों में वही चेयरमैन बने हैं, जिनके नाम मेयर देवेश मोदगिल ने ही तय थे, सिवाय एक को छोड़कर।
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मालूम हो कि हर बार प्रस्तावित चेयरमैन और सदस्य तय करने का अधिकार मेयर के हाथ में ही होता है। ऐसा पहली बार होगा जब किसी सब कमेटी के चेयरमैन पद के लिए चुनाव होगा। चार जुलाई को मतदान की तारीख तय की गई है। हर सब कमेटी में 9 पार्षद शामिल हैं, जो कमेटी के सदस्य हैं। मनोनीत पार्षदों के पास वोटिंग अधिकार न होने के बावजूद उन्हें सब कमेटियों में शामिल किया गया है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि मेयर द्वारा तय किया गया उम्मीदवार जीतता है या फिर टंडन गुट का उम्मीदवार। शक्ति देव शाली भाजपा के जिला अध्यक्ष भी हैं।

नामांकन भरने से पहले टंडन गुट के पार्षदों ने बैठक की, जिसमें पूर्व मेयर आशा जसवाल और अरुण सूद ने भी भाग लिया। इस बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि दलीप शर्मा ने नगर निगम चुनाव में पार्टी उम्मीदवार राज किशोर को हराया था, ऐसे में दलीप शर्मा को चेयरमैन पद नहीं देना चाहिए। बैठक में यह भी बात उठी कि दलीप शर्मा का नाम पिछले साल अतिक्रमण हटाओ दस्ते के दो सब इंस्पेक्टरों की आपसी बातचीत में भी सामने आया था। उसमें दलीप पर आरोप लगे थे। ऐसे में दलीप शर्मा को अतिक्रमण हटाओ दस्ते की चेयरमैनी पद देने से रोका जाना चाहिए।
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मालूम हो कि नगर निगम का एक मात्र निर्दलीय पार्षद दलीप शर्मा ने इस साल होने वाले मेयर चुनाव में देवेश मोदगिल का साथ दिया था, जिसका इनाम मोदगिल प्रस्तावित चेयरमैन बना कर देना चाहते थे लेकिन टंडन गुट ने शक्ति देव शाली का नामांकन भरवा कर खेल कर दिया। उधर, भाजपा पार्षद शक्ति देव शाली का कहना है कि वह पार्टी के उम्मीदवार हैं। अतिक्रमण हटाने के साथ साथ वेंडर एक्ट को लागू करवाना है। इसलिए उन्होंने नामांकन भरा है। वहीं, निर्दलीय पार्षद दलीप शर्मा का कहना है कि उन्होंने नामांकन भर दिया है। अब वह पीछे नहीं हटेंगे और चुनाव लड़ेंगे।

अन्य कमेटियों के लिए हुए नामांकन
अकाली पार्षद हरदीप सिंह ने रोड, कंवरजीत राणा ने रोड, रवि शर्मा ने हाउस टैक्स, सतीश कैंथ ने सिटी ब्यूटीफिकेशन, महेश इंद्र सिद्धू ने सैनिटेशन, राजेश गुप्ता ने बिजली, सत प्रकाश अग्रवाल ने फायर, भरत कुमार ने अपनी मंडी, रविंदर कौर गुजराल ने वुमन इंपावरमेंट, अनिल दूबे को स्लम, शिप्रा बंसल को आर्ट एंड कल्चर, ज्योत्सना विग ने प्राइमरी स्वास्थ्य और सुनीता धवन ने प्राइमरी शिक्षा कमेटी के चेयरपर्सन के लिए नामांकन भरा है, जिनके खिलाफ कोई अन्य उम्मीदवार नहीं आया।

अभी चार दिन पहले ही सभी सब कमेटियों के सदस्यों की अधिसूचना प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने जारी की है। हर साल जब भी मेयर की ओर से सब कमेटियों के सदस्यों के नाम तय किए जाते हैं, उनमें जिसका नाम पहले नंबर पर होता है, वही चेयरमैन पद के लिए चुनाव लड़ता है। उक्त सभी ने इसी के तहत नामांकन दाखिल किया है। मेयर देवेश मोदगिल के साथ वैसे भी टंडन गुट का छत्तीस का आंकड़ा है। जब पार्टी ने मोदगिल को मेयर का उम्मीदवार बनाया था तो टंडन गुट ने इसका खुलकर विरोध किया था।

सदन ने ही मुझे यह अधिकार दिया है कि मैं कमेटियों के सदस्यों का नाम फाइनल करूं। उन नामों को ही प्रशासक ने अधिसूचित किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह से सब कमेटी के चेयरमैन पद के लिए चुनाव हो रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए था। सभी को प्रतिनिधित्व देकर शहर के विकास को सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया था।
- देवेश मोदगिल, मेयर

यह है सदस्य अतिक्रमण हटाओ कमेटी के चेयरमैन के लिए करेंगे मतदान
इस कमेटी में शक्ति देव शाली, दलीप शर्मा, सतीश कैंथ, एमएस कांडल, राजेश गुप्ता, शीला देवी, महेश इंद्र सिद्धू, हरदीप सिंह और जगतार जग्गा सदस्य हैं जबकि एमएस कांडल मनोनीत पार्षद होने के कारण वोट नहीं कर पाएंगे। ऐसे में बाकी बचे 8 सदस्य मतदान करेंगे। इनमे 4 पार्षद टंडन गुट के हैं।

छह माह ही काम करेंगी कमेटियां
सब कमेटियों का कार्यकाल इस साल का छह माह का निकल चुका है, ऐसे में कमेटियां अगले छह माह ही काम करेंगी। ऐसा पहली बार हुआ है जब सब कमेटियों इतनी देर से गठित हुई हाें। इस बार मनोनीत पार्षदों को सब कमेटियों में शामिल करना है या नहीं, इस पर ही निर्णय नहीं हो पा रहा था, जिस कारण कमेटियों की अधिसूचना देरी से हुई।
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