एडवाइजर विजय देव सट्टेबाजी और नशाखोरी जैसे गैरकानूनी कामों केसख्त खिलाफ थे। वह इन पर लगाम कसने केलिए पुलिस अधिकारियों की क्लास लेते रहते थे। एडवाइजर की पूरी टीम इसे रोकने केलिए शिद्दत से जुटी थी। उनकी सख्ती ने नशा तस्करों और सट्टेबाजों का धंधा चौपट कर दिया था। इससे कुछ राजनेताओं के हित भी प्रभावित हो रहे थे।
इन्हीं राजनीतिक लोगों ने प्रशासन का चेहरा बदलवाने की साजिश रची। इसलिए पहले एडवाइजर की टीम के अधिकारियों को ट्रांसफर करवाया। उसके अगले ही दिन एडवाइजर विजय कुमार देव को भी चलता कर दिया गया।
पूर्व मेयर पूनम शर्मा ने जब रंगे हाथों सट्टेबाजों को पकड़ा, उसके बाद तो एडवाइजर ने पुलिस की जमकर खिंचाई की। साफ कहा कि जब मेयर सट्टेबाजों केठिकानों तक पहुंच सकती हैं तो पुलिस को क्यों नहीं पता चलता। एडवाइजर की इन सब बातों का पुलिस पर जबरदस्त दबाव था। इस दबाव ने बहुत से सट्टेबाजों और नशे केव्यापारियों के धंधे चौपट कर दिए थे।
प्रभावित हो रहा था पंजाब में नशे का कारोबार
पंजाब से बड़ी मात्रा में नशा चंडीगढ़ सप्लाई होता रहा है। पंजाब के कारोबारियों ने नशे की एक बड़ी मार्केट चंडीगढ़ में तैयार कर दी थी। लेकिन एडवाइजर की निगाह और दबाव ने इन कारोबारियों का धंधा ठप कर दिया। कारोबारियों के लंबे हाथों की पहुंच पंजाब की बड़ी राजनीतिक हस्तियों तक है। इन्हीं राजनीतिक हस्तियों से एडवाइजर के ट्रांसफर का दबाव डलवाया गया।
यह भी रही वजह
गांवों को निगम में शामिल करने का मामला
एडवाइजर चंडीगढ़ के साथ लगते 13 गांवों को नगर निगम में जोड़ने के हिमायती थे। वह लगातार इसको लेकर अधिकारियों से मीटिंग भी करते रहे। बीजेपी गांवों को निगम में शामिल करने का विरोध करती रही है। अपनी मांग को मनवाने के लिए बीजेपी के नेता कुछ दिन पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिले थे। बताया जा रहा है कि बीजेपी नेताओं ने राजनाथ सिंह से प्रशासन की शिकायत की।
डीजल ऑटो पर रोक
विजय देव ने पर्यावरण सुरक्षा को देखते हुए शहर में डीजल ऑटो को पूर्ण तौर से पाबंदी लगवा दी। ऑटो माफिया नेताओं पर डीजल ऑटो चलवाने केलिए लगातार दबाव बनाते रहे। एडवाइजर प्रेस वार्ता में खुद इस बात का खुलासा कर चुके हैं कि ऑटो के लिए न जाने कहां-कहां से फोन आ रहे हैं। लेकिन शहर की पीढ़ी को सुरक्षित रखने केलिए मैं किसी दबाव में आने वाला नहीं। बाद में प्रशासक सोलंकी से भी ऑटो चलवाने की सिफारिशें की गई।
कैडर वार भी एक वजह
एडवाइजर विजय देव ने चंडीगढ़ में यूटी कैडर को मजबूत किया। कई अहम विभाग पंजाब और हरियाणा केअधिकारियों से लेकर यूटी कैडर के अधिकारियों को सौंप दिए । हरियाणा कैडर के डीसी अजीत बालाजी जोशी से एक्साइज एंड टैक्सेशन और लेबर विभाग लेकर यूटी के जितेंद्र यादव को दिया। इससे पहले तक यह विभाग हमेशा डीसी के पास ही रहे हैं। पूर्व डीसी मोहम्मद शाईन के जाने के बाद एक समय ऐसा रहा जब डीसी, एस्टेट जैसे सभी विभाग यूटी कैडर के पास रहे। तीनों एसडीएम भी इसी कैडर के रहे। ट्रांसपोर्ट जैसे अहम विभाग पंजाब कैडर की अधिकारी भावना गर्ग से लेकर यूटी कैडर के अधिकारी विक्रम देव दत्त को दे दिए गए। इसके अलावा पंजाब कैडर के ही वित्त सचिव केपास रहने वाले टेकिभनकल एजुकेशन, अर्बन प्लानिंग और साइंस एंड टेकभनोलॉजी जैसे विभाग भी विक्रम देव दत्त को दे दिए गए। पंजाब और हरियाणा अपना अधिकार खोता देख कई बार शिकायत कर चुके हैं।
प्रशासक के ऑफिस में शिफ्ट होना
एडवाइजर विजय कुमार देव रेनोवेशन के कारण प्रशासक के ऑफिस में शिफ्ट हो गए। रेनोवेशन होने के बाद अपना ऑफिस विक्रम देव दत्त को अलॉट कर दिया और खुद अब तक प्रशासक के कमरे में ही बैठ रहे थे। इसके अलावा 26 जनवरी के कार्यक्रम को लेकर भी विवाद रहा। इस कार्यक्रम में अतिथि होने के कार्ड एडवाइजर के नाम से बंट चुके थे। एडवाइजर ने ही मेहमानों को हाईटी पर आमंत्रित किया था। लेकिन बाद में प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी कार्यक्रम में मुख्यातिथि हुए और उन्होंने ही एट होम कार्यक्रम में मेहमानों को आमंत्रित किया। बाद में एडवाइजर को हाईटी रद्द करनी पड़ी।
घर की रेनोवेशन से घिरे
एडवाइजर ने अपने घर की रेनोवशन पर ढाई करोड़ रुपये खर्च किए। इस वजह से उनकी काफी किरकिरी हुई। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चंडीगढ़ दौरे को देखते हुए स्कूल बंद करने के फैसले ने भी प्रशासन की खूब खिंचाई करवाई। इस पर खुद मोदी ने जवाब मांग लिया था। हालांकि इससे सबक लेते हुए गणतंत्र दिवस से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चंडीगढ़ दौरा ऐतिहासिक बनाया।