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कनाडा में पढ़ाई करने का असली सच- स्टडी सिर्फ नाम की, फीस निकालने को विद्यार्थी कर रहे नौकरी

Sat, 31 Aug 2019 10:50 AM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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फाइल फोटो
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कनाडा में हर साल औसतन एक लाख विद्यार्थी स्टडी के लिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फीस निकालने के लिए वहां विद्यार्थी नौकरी करते हैं। महज 2-3 फीसदी स्टूडेंट ही क्वालिटी एजुकेशन के लिए कनाडा की यूनिवर्सिटी में दाखिला लेते हैं। विद्यार्थियों का मकसद कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी(पीआर) लेना है। हालात यह हैं कि कनाडा में स्टडी के लिए जाने वाले विद्यार्थी कई-कई साल पिज्जा डिलीवरी से लेकर कॉफी शॉप पर काम कर अपने अगले सेमेस्टर की फीस निकालने को मजबूर होते हैं।
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पंजाब से 12 आर्ट्स और कॉमर्स के साथ करने वाले विद्यार्थियों का ज्यादा बुरा हाल होता है। यहां से उनका दाखिला कनाडा के कॉलेजों में ऑफिस मैनेजमेंट, जनरल बिजनेस, इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजमेंट जैसे कोर्स करवाकर कनाडा भेज दिया जाता है। इस विषय की डिग्री या डिप्लोमा करने वालों के लिए वहां पर नौकरी न के बराबर है।

ऐसे में विद्यार्थी किसी पिज्जा शॉप से लेकर मजदूरी करने को मजबूर हो जाते हैं। अगर एक लाख स्टूडेंट भारत से जाते हैं तो ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 60 फीसदी के आसपास है। स्टूडेंट अगर मजदूरी कर फीस निकालकर अपना डिप्लोमा पूरा भी कर लेता है तो उसके बाद भी नौकरी नहीं है, ऐसे में विद्यार्थी पीआर लेने के लिए मेहनत मजदूरी और होटलों में वेटर तक की नौकरी कई साल करते हैं।
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12वीं में मेडिकल के जो विद्यार्थी कनाडा का रुख करते हैं, उनके पास सोशल सर्विस, चाइल्ड केयर, पर्सनल स्पोर्ट जैसे कोर्स ही मिलते हैं। स्टूडेंट का मकसद कॉलेज में दाखिला लेकर वर्क परमिट लेकर सिर्फ पीआर लेना ही होता है। लगातार दो साल तक वेटर से लेकर दुकानों पर काम कर ये स्टडी पूरी तो कर लेते हैं लेकिन भविष्य में भी नौकरी न के बराबर हैं।

नॉन मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए कुछ राहत है, कनाडा में इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए कुछ नौकरियां हैं, लेकिन इन स्टूडेंट्स को भी स्टडी के दौरान किसी होटल में नौकरी से लेकर टैक्सी चलाकर ही फीस निकालनी पड़ती है। दरअसल, कनाडा सरकार की तरफ से विद्यार्थी को प्रति सप्ताह 20 घंटे कार्य करने की परमिशन है लेकिन विद्यार्थियों को मजदूरी वाले काम ही करने पड़ते हैं।

हर सेमेस्टर की फीस पांच लाख है जबकि एक सेमेस्टर में रहने और खाने का खर्च 1.5 लाख के आसपास अलग से आता है। ऐसे में विद्यार्थी अपनी स्टडी से भटक सप्ताह में 20 घंटे होटलों में वेटर से लेकर दुकानों में काम करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। उनका मकसद सिर्फ पीआर तक ही रह जाता है।
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कनाडा में पीआर ही फोकस है...

त्रिवेदी ओवरसीज के एमडी सुकांत त्रिवेदी का कहना है कि कनाडा में सीरियस स्टडी के लिए जाने वाले विद्यार्थी काफी कम है। जो विद्यार्थी जा रहे हैं, उनका मकसद सिर्फ किसी तरह से पीआर लेना है। पहले साल की फीस तो अभिभावक भर देते हैं लेकिन दूसरे साल की फीस व अपना खर्च निकालने के लिए मजदूरी तो करनी पड़ती है। जब विद्यार्थी अपने फील्ड से हटकर जॉब करते हैं तो उनका फोकस स्टडी से खत्म होकर डॉलर कमाने की तरफ हो जाता है।
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