मुझे बेटी को डॉक्टर बनाना था क्योंकि परिवार में कोई भी डॉक्टर नहीं है लेकिन इसके स्कूल के पुराने कोच ने कहा कि कुछ समय के लिए इसे शूटिंग करने दो। अगर बेहतर न कर पाई तो इसे डॉक्टरी की पढ़ाई में लगा देना। इसके बाद बेटी ने नेशनल के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग में पदक जीत लिया, जिसके बाद उसे शूटिंग में कॅरिअर बनाने दिया। यह कहना है ओलंपियन शूटिंग खिलाड़ी मनु भाकर की मां सुमेधा भाकर का।
मनु भाकर ने चीन के हांगझोऊ में हो रहे 19वें एशियन गेम्स में 25 मीटर रैपिड पिस्टल में बुधवार को स्वर्ण पदक जीता है। टीम में मनु भाकर के साथ ईशा सिंह और रिदम सिंह शामिल रहे। मनु भाकर चंडीगढ़ के सेक्टर- 10 स्थित डीएवी कॉलेज में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। स्वर्ण पदक जीतने के बाद शहर के शूटिंग खिलाड़ियों में जोश है। डीएवी कॉलेज के प्रोफेसर और शूटिंग कोच अमनिंदर मान ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें भरोसा था कि मनु स्वर्ण पदक जीतने में जरूर कामयाब होगी।
मुझे और परिवार को बेटी पर गर्व
मां सुमेधा भाकर ने बताया कि सुबह ही बेटी के साथ व्हाट्सएप पर बातचीत हुई। उसने कहा कि आज मेरा इवेंट है। मैंने उसे बेहतर कर पदक जीतने का प्रयास करने की बात कही। इसके बाद टीवी स्क्रीन पर बेटी का मुकाबला देखा। जैसे ही टीम इंडिया ने स्वर्ण पर निशाना साधा, वह पल पूरे परिवार के साथ देश के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। बेटी पर गर्व है। मनु के पिता पिता राम किशन भाकर मर्चेंट नेवी में हैं।
ओलंपिक से पहले एशियन गेम्स पर थी मनु की नजर
मनु भाकर कुछ दिनों पहले पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉकी ग्राउंड पर गवर्नमेंट स्कूल-15, खुड्डा लाहौरा में अन्य स्कूलों के युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के साथ खेल किट्स बांटने पहुंची थीं। उस समय मनु भाकर ने कहा था कि पेरिस ओलंपिक 2024 से पहले उनका पूरा ध्यान एशियन गेम्स में पदक जीतने पर है।