क्यों मायने रखती है राम रहीम की फरलो
राम रहीम की फरलो पंजाब के चुनावी मौसम में इसलिए मायने रखती है, क्योंकि सूबे में कांग्रेस ने अनुसूचित जाति के वोट बैंक को लुभाने के लिए चन्नी को चेहरा बनाया है। डेरा सच्चा सौदा के अधिकतर अनुयायी भी अनुसूचित जाति के हैं। ऐसे में डेरामुखी के बाहर आने के बाद मामला रोचक हो जाएगा। हालांकि, चुनाव में सक्रिय भागीदारी या चुनाव प्रभावित करने की कोशिश डेरामुखी की फरलो रद्द करवा सकती हैं।
पंजाब में डेरों की अहम भूमिका रहती है। डेरा सच्चा सौदा में अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या ज्यादा है। मुख्यमंत्री पद के सभी दावेदार मालवा से हैं। डेरों में सबसे ज्यादा डेरा सच्चा सौदा बड़ा डेरा है। गुरमीत सिंह प्रोफेसर पंजाब विश्वविद्यालय
राम रहीम को बाहर लाना सरकार के लिए परेशानी का सबब नहीं बनेगा यह देखना होगा, क्योंकि डेरा अनुयायियों ने यदि डेरा प्रमुख से मिलने की कोशिश की तो दिक्कत बढ़ जाएगी। यह वही डेरा प्रमुख है। जिसे गिरफ्तार करने के लिए पूरा सरकारी अमला झोंक दिया गया था। पंचकूला में डेरा समर्थकों द्वारा मचाया गया उपद्रव और गोलीकांड अभी भी लोगों के जहन में मौजूद है।
फरलो पर जाना एक आम कैदी का अधिकार: मनोहर लाल
राम रहीम को फरलो मिलने पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि सरकारी सिस्टम व कानूनी प्रक्रियाएं देश के संविधान के हिसाब से चलती हैं, जिसके तहत हर व्यक्ति के अधिकार संरक्षित हैं। किसी व्यक्ति को फरलो देना एक प्रकार से कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया है। फरलो पर जाना आम कैदी का अधिकार है। इसका चुनाव के संबंध में कोई मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। जो कैदी तीन साल की अवधि पूरा कर लेता है वो फरलो के लिए आवेदन कर सकता है। इसके बाद सामान्य प्रशासन और जेल प्रशासन उसके आवेदन पर विचार कर अंतिम फैसला करते हैं। यह एक प्रकार से नियमित प्रक्रिया होती है।