फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राष्ट्रीय युवा दिवस: किसी ने नुक्कड़ नाटक से किया जागरुक तो किसी ने कोरोना काल में 24 घंटे तक की मरीजों की सेवा

Wed, 12 Jan 2022 05:23 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

2020 अप्रैल से अब तक कोविड-19 अस्पताल में भर्ती 4000 से ज्यादा गंभीर मरीजों का एक्स-रे किया जा चुका है। सुशील का कार्य इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भर्ती मरीजों के इलाज से पहले उनकी डायग्नोसिस बेहद जरूरी है
विज्ञापन
नुक्कड़ नाटक करते कलाकार - फोटो : फाइल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चंडीगढ़ के रंगमंच ग्रुप थिएटर फॉर थिएटर के सदस्य सौरभ शर्मा ने लॉकडाउन में देखा कि लोग कोरोना महामारी की अफवाह से बहुत परेशान हैं। कोरोना टीकाकरण को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैला रहे हैं। टीका लगवाना खतरे से खाली नहीं है। सौरभ ने लोगों की अफवाहों के किस्सों से ही नाटक का लेखन किया। लोगों को वह जीवंत लगे। लोगों को बताया कि उनके बीच गलत सूचनाएं पहुंचाई जा रही हैं। सौरभ ने टीम के साथ मिलकर सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के सहयोग से शहर की कॉलोनियों और डिस्पेंसरी के सामने नुक्कड़ नाटक कोरोना से डरो ना का मंचन किया। लोगों को जागरुकता से संबंधित पर्चे बांटे। 

विज्ञापन


टीम के सदस्य लोगों को टीकाकरण करवाने के लिए जागरूक करते और अधिक से अधिक संख्या में इस ड्राइव में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करते। जिससे इस बीमारी से उन्हें निजात मिल सके। नाटक में कोरोना से बचाव के लिए स्वस्थ खानपान के महत्व को भी शामिल किया गया। नाटक में उनके साथ टीएफटी के प्रिंस शर्मा, अंकुश राणा, ईशु बब्बर, मिताली, प्रंशात, सरबजीत, हरविंदर व अन्य साथियों ने सहयोग दिया। 

पेंटिंग से लोगों को सकारात्मक उम्मीद की दिखाई किरण
शहर की पेंटर रश्मिता ने कोरोना काल में लोगों को सकात्मक उम्मीद की किरण पेंटिंग के जरिए दिखाई। लोगों को जागरूक करने के लिए ललित कला अकादमी ने प्रदर्शनी का आयोजन किया। जिसमें रश्मिता की कोविड पर बनी पेंटिंग को काफी सराहा गया। उन्होंने बताया कि जब कोरोना हमारे जीवन में आया तो पहले और दूसरे लॉकडाउन में लोग बहुत निराश हो गए थे। एक-दूसरे के पास जाने से डरते थे। इन्हीं सब अहसासों को रंगों के जरिए पेंटिंग में बयां किया। लोगों को दिखाया कि डर की रात खत्म होगी और नया सूरज निकलेगा। लोगों की भावनाएं और अनुभव पेंटिंग का माध्यम बनीं। इंसान और पर्यावरण को एक दूसरे से जोड़कर पेंटिंग में दिखाया। 

विज्ञापन

एक ने कोरोना मरीजों की जारी रखी जांच, दूसरे ने नहीं होने दी ऑक्सीजन की कमी

कोरोना महामारी के दौरान जब हर तरफ निराशा और डर छाया था तब युवा जज्बे से ओतप्रोत कुछ लोगों ने जान की परवाह किए दिन रात मेहनत की। स्वास्थ्य क्षेत्र के ऐसे ही युवा योद्धाओं में शामिल हैं पीजीआई रेडियोडायग्नोसिस विभाग के सुशील कुमार बत्तन और स्वास्थ्य विभाग के एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मनजीत सिंह। इन्होंने अपनी सूझबूझ और युवा जज्बे के आगे कोरोना को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। एक बदौलत बिना बाधा जांच की सुविधा जारी रही तो दूसरे ने मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी। 

युवा जज्बा के आगे कोरोना ने भी घुटने टेके
पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग के सुपरवाइजर सुशील कुमार बत्तन सामान्य दिनों में इमरजेंसी एरिया के रेडियोडायग्नोसिस उपकरणों के मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संभालते हैं। लेकिन, कोविड के दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेदारी के साथ ही 2020 अप्रैल से कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए रेडियोडायग्नोसिस की सुविधा के बेहतर प्रबंधन का भी काम बतौर निभाया है।

2020 अप्रैल से अब तक कोविड-19 अस्पताल में भर्ती 4000 से ज्यादा गंभीर मरीजों का एक्स-रे किया जा चुका है। सुशील का कार्य इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भर्ती मरीजों के इलाज से पहले उनकी डायग्नोसिस बेहद जरूरी है। ऐसे में सुशील ने 24-24 घंटे मेहनत की। खुशी की बात यह है कि लगातार 2 सालों तक कोरोना के मरीजों के सीधे संपर्क में आने के बावजूद उन्हें संक्रमण छू तक नहीं सका है। 
विज्ञापन

24 घंटे की लगातार मेहनत

जीएमएसएच 16 के एनेस्थीसिया विभाग में बतौर सीनियर मेडिकल ऑफिसर तैनात डॉ. मंजीत सिंह अप्रैल 2020 से शहर में ऑक्सीजन प्रबंधन के प्रभारी हैं। उन्होंने अपनी ड्यूटी को रोके बिना सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक ओटी में ड्यूटी देने के बाद शहर के सरकारी व निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति के बेहतर प्रबंधन के लिए अथक प्रयत्न कर रहे हैं। उनकी कड़ी मेहनत, लगन और निष्ठा का ही परिणाम है कि कोरोना की दूसरी लहर से अब तक शहर में ऑक्सीजन की कमी उत्पन्न नहीं हो पाई है। डॉक्टर मंजीत को उनकी मेहनत और ईमानदारी के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने सम्मानित भी किया है।

इंसानियत का फर्ज निभाया, भूखों को खाना खिलाया 
कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर के दौरान पुलिस जवानों ने भी सराहनीय कार्य किये। उन्होंने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए भूखों का खाना खिलाया और बेजुबानों का भी पूरा ख्याल रखा। इतना ही नहीं मोर्चरी से शव निकलवा कर संस्कार किया। सेक्टर-24 स्थित जिला अपराध प्रकोष्ठ प्रभारी नरेंद्र पटियाल और एएसआई अविनाश राणा कोरोना के दौरान लोगों की खूब मदद की। 

पहली लहर में प्रशासन ने सेक्टर-26 बापूधाम कॉलोनी को कंटेनमेंट जोन घोषित किया था। इलाके में अनिवार्य सेवाओं में लगे लोगों को छोड़कर अन्य किसी के भी जाने पर पाबंदी थी। पटियाल ने खुद की परवाह किए बिना लोगों की मदद की। उन्होंने कंटेनमेंट जोन में लोगों के घर जाकर बच्चों को किताबें भी बांटी।

सिपाही ने संस्कार कर परिजन का फर्ज निभाया
पीजीआई चौकी में तैनात सिपाही संदीप मौण ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर में लगभग पांच से छह सौ कोरोना संक्रमितों की मदद की। जिन लोगों की मौत हो गई थी उनके शव मोर्चरी से हासिल कर अंतिम संस्कार किया। अब तक वह नौ हजार से ज्यादा पीड़ितों की मदद कर चुके हैं। मोर्चरी में 10 शव ऐसे थे, जिसे परिवार वाले लेने के लिए तैयार नहीं थे। संदीप मौण ने शव को मोर्चरी से रिलीज करवाया और अंतिम संस्कार करवाया। संदीप ने बताया कि उन्हें लोगों की मदद करने में आनंद मिलता है। वह लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें