कोरोना महामारी के दौरान जब हर तरफ निराशा और डर छाया था तब युवा जज्बे से ओतप्रोत कुछ लोगों ने जान की परवाह किए दिन रात मेहनत की। स्वास्थ्य क्षेत्र के ऐसे ही युवा योद्धाओं में शामिल हैं पीजीआई रेडियोडायग्नोसिस विभाग के सुशील कुमार बत्तन और स्वास्थ्य विभाग के एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मनजीत सिंह। इन्होंने अपनी सूझबूझ और युवा जज्बे के आगे कोरोना को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। एक बदौलत बिना बाधा जांच की सुविधा जारी रही तो दूसरे ने मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी।
युवा जज्बा के आगे कोरोना ने भी घुटने टेके
पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग के सुपरवाइजर सुशील कुमार बत्तन सामान्य दिनों में इमरजेंसी एरिया के रेडियोडायग्नोसिस उपकरणों के मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संभालते हैं। लेकिन, कोविड के दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेदारी के साथ ही 2020 अप्रैल से कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए रेडियोडायग्नोसिस की सुविधा के बेहतर प्रबंधन का भी काम बतौर निभाया है।
2020 अप्रैल से अब तक कोविड-19 अस्पताल में भर्ती 4000 से ज्यादा गंभीर मरीजों का एक्स-रे किया जा चुका है। सुशील का कार्य इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भर्ती मरीजों के इलाज से पहले उनकी डायग्नोसिस बेहद जरूरी है। ऐसे में सुशील ने 24-24 घंटे मेहनत की। खुशी की बात यह है कि लगातार 2 सालों तक कोरोना के मरीजों के सीधे संपर्क में आने के बावजूद उन्हें संक्रमण छू तक नहीं सका है।
जीएमएसएच 16 के एनेस्थीसिया विभाग में बतौर सीनियर मेडिकल ऑफिसर तैनात डॉ. मंजीत सिंह अप्रैल 2020 से शहर में ऑक्सीजन प्रबंधन के प्रभारी हैं। उन्होंने अपनी ड्यूटी को रोके बिना सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक ओटी में ड्यूटी देने के बाद शहर के सरकारी व निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति के बेहतर प्रबंधन के लिए अथक प्रयत्न कर रहे हैं। उनकी कड़ी मेहनत, लगन और निष्ठा का ही परिणाम है कि कोरोना की दूसरी लहर से अब तक शहर में ऑक्सीजन की कमी उत्पन्न नहीं हो पाई है। डॉक्टर मंजीत को उनकी मेहनत और ईमानदारी के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने सम्मानित भी किया है।
इंसानियत का फर्ज निभाया, भूखों को खाना खिलाया
कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर के दौरान पुलिस जवानों ने भी सराहनीय कार्य किये। उन्होंने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए भूखों का खाना खिलाया और बेजुबानों का भी पूरा ख्याल रखा। इतना ही नहीं मोर्चरी से शव निकलवा कर संस्कार किया। सेक्टर-24 स्थित जिला अपराध प्रकोष्ठ प्रभारी नरेंद्र पटियाल और एएसआई अविनाश राणा कोरोना के दौरान लोगों की खूब मदद की।
पहली लहर में प्रशासन ने सेक्टर-26 बापूधाम कॉलोनी को कंटेनमेंट जोन घोषित किया था। इलाके में अनिवार्य सेवाओं में लगे लोगों को छोड़कर अन्य किसी के भी जाने पर पाबंदी थी। पटियाल ने खुद की परवाह किए बिना लोगों की मदद की। उन्होंने कंटेनमेंट जोन में लोगों के घर जाकर बच्चों को किताबें भी बांटी।
सिपाही ने संस्कार कर परिजन का फर्ज निभाया
पीजीआई चौकी में तैनात सिपाही संदीप मौण ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर में लगभग पांच से छह सौ कोरोना संक्रमितों की मदद की। जिन लोगों की मौत हो गई थी उनके शव मोर्चरी से हासिल कर अंतिम संस्कार किया। अब तक वह नौ हजार से ज्यादा पीड़ितों की मदद कर चुके हैं। मोर्चरी में 10 शव ऐसे थे, जिसे परिवार वाले लेने के लिए तैयार नहीं थे। संदीप मौण ने शव को मोर्चरी से रिलीज करवाया और अंतिम संस्कार करवाया। संदीप ने बताया कि उन्हें लोगों की मदद करने में आनंद मिलता है। वह लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।