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जब दशहरे के दिन ट्रैक पर दौड़ी मौत की ट्रेन, दोनों तरफ बिछ गई थीं 59 लाशें, नहीं भूलती चीत्कारें

Wed, 09 Oct 2019 12:59 AM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
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अमृतसर ट्रेन हादसा के बाद विलाप करते पीड़ितों के परिजनों की फाइल फोटो - फोटो : PTI
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19 अक्तूबर 2018 को एक ट्रेन अमृतसर में लोगों की भीड़ को कुचलते हुए आगे बढ़ गई। यह लोग जौड़ा फाटक पर रेल की पटरी पर खड़े होकर दशहरा देख रहे थे। रावण दहन के दौरान पटाखों की आवाज में कब ट्रेन का हार्न और लोगों की चीखें दब गई, किसी को पता ही नहीं चला। जब तक पता चला तब तक ट्रेन काफी दूर निकल चुकी थी और पटरी पर बिछी थी सिर्फ लाशें।

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अमृतसर के जौड़ा फाटक के पास स्थित धोबीघाट इलाके के एक मैदान में रावण दहन का कार्यक्रम था। कार्यक्रम स्थल रेलवे लाइन के करीब था। हादसे के वीडियो के अनुसार पूर्व सीपीएस नवजोत कौर सिद्धू शाम 6:40 मिनट के करीब स्टेज पर पहुंचती हैं। उनके पहुंचने के 14 मिनट 6:54 बजे रावण का दहन होता है। पुतला दहन के वक्त तक नवजोत कौर मंच पर थीं। इसके 30 सेकेंड बाद ही हादसा हो गया। हालांकि हादसा इस कैमरे में कैद नहीं हो पाया।

रावण दहन के करीब 58 सेकेंड बाद नवजोत कौर मंच से उतरकर चली गईं। नवजोत कौर के जाने के एक मिनट बाद ही कोहराम मच जाता है। वहां पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी शुरू होती है और पुलिसकर्मी रेलवे लाइन की तरफ जाते दिखते हैं। पता चला कि उत्सव देखते-देखते लोग रेलवे ट्रैक पर आ गए तभी अमृतसर-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर सौ से अधिक स्पीड में दो ट्रेनें आ गई। हादसा अमृतसर के रेलवे फाटक नंबर 27 के पास हुआ। 

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फाइल फोटो
डीएमयू 74943 और हावड़ा एक्सप्रेस एक साथ विपरीत दिशा से आई और लोगों को कुचलते हुए आगे निकल गई। जहां दशहरा मनाया जा रहा था, वह बिल्कुल पटरी के पास था। बेशक आयोजन स्थल और पटरी के बीच चारदीवारी थी लेकिन वह काफी नीची थी और लोगों को पटरी पर खड़े होकर दशहरा देखना काफी आसान लग रहा था। 

घटना के बाद ऐसा हाहाकार मचा कि पूरा अमृतसर जौड़ा फाटक की तरफ दौड़ता नजर आया। घटनास्थल की ऐसी हालत थी कि रात करीब 10 बजे तक भी पुलिस कमिश्नर सुधांशु श्रीवास्तव यह बता नहीं पा रहे थे कि कितने लोगों की जान गई। 

सिविल अस्पताल से लेकर जौड़ा फाटक का नजारा काफी दर्दनाक था, नंगे पांव ही लोग अस्पताल की तरफ भाग रहे थे। अस्पताल में शव गृह भर चुका था, बाहर नारेबाजी हो रही थी। शव गृह में कोई इंचार्ज नहीं था, पूरा कमरा लाशों से भरा हुआ था। आसपास के कमरों को भी खोला गया तो पता ही नहीं चला कि कब वह कमरे भी लाशों से भर गए। पुलिस मुलाजिम सूचियां जरूर तैयार कर रहे थे। अस्पताल प्रशासन कह रहा था, कितने मरे, कितने घायल हैं, हमें कुछ नहीं पता। सिर्फ इतना सुन रहे हैं कि 200-300 लोग मर गए हैं। 
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