करीब दो सौ साल से कैथल में चली आ रही रावण दहन की परंपरा इस साल टूटने जा रही है। इस बार रामलीला मैदान में रावण दहन नहीं होगा। यहां लाखों लोग रावण दहन देखने के लिए आते थे लेकिन इस बार कमेटी ने आर्थिक तंगी के कारण रावण का पुतला नहीं बनवाया।
रामलीला कमेटी की चंदाना गेट के प्रधान चंद्रप्रकाश सर्राफ ने बताया कि 30 साल से कमेटी के प्रधान हैं। खुद के खर्चे पर तीस साल से रावण का पुतला तैयार करवाते रहे। इसमें लगभग एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च होता है।
कमेटी में कुछ सदस्य हैं, जिन्होंने रावण दहन के लिए पैसे एकत्रित करने से मनाकर दिया दिया है जिस कारण रावण का पुतला न बनाने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कैथल में करीब 200 साल से रावण दहन हो रहा है जिसमें प्रदेशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मेले का आनंद लेते हैं।
उन्होंने बताया कि शहर के मुख्य मंदिरों में रामलीला होनी बंद हो चुकी है। करीब पांच साल पहले शहर के दो मंदिरों और गोशाला में रामलीला होती थी जिसमें रामलीला का मंचन करने वाले कलाकार रामलीला मैदान में पहुंचकर रावण का दहन करते थे लेकिन कुछ साल से रामलीला का आयोजन बंद हो गया। पिछले वर्ष भी रावण का दहन स्वयं कमेटी के सदस्यों द्वारा किया गया था।
मेले से हजारों लोगों को मिलता था रोजगार
चंदाना गेट पर लगने वाले दशहरा मेले पर हजारों लोगों को रोजगार मिलता था। मेले में करीब दो हजार दुकानें लगती थीं। जिलेभर के दुकानदार दशहरे से एक दिन पहले रामलीला मैदान के चारों ओर दुकानें लगाकर बैठ जाते थे।