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Chandigarh: नए सत्र में किताबों के दाम से अभिभावक परेशान, आठ से दस हजार की आ रहीं बुक्स, प्रशासन चुप

Mon, 03 Apr 2023 04:35 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज, चंडीगढ़

सार

स्कूलों द्वारा तय निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की किताबों से पांच गुना तक महंगी हैं। एनसीईआरटी की 256 पन्नों की एक किताब 65 रुपये की है जबकि निजी प्रकाशक की 167 पन्नों की किताब 305 रुपये में मिल रही है।
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सेक्टर 19 में दुकान पर किताबें लेने पहुंचे अभिभावक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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स्कूलों में नया सत्र शुरू होते ही अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है। एक से दो माह की फीस के साथ स्कूलों में डेवलपमेंट फीस के नाम पर ली जाने वाली मोटी रकम भरनी है तो कॉपी-किताब भी खरीदना है। कॉपी-किताब का सेट इतना महंगा है कि उसे खरीदने में अभिभावकों के पसीने निकल जा रहे हैं। कई निजी स्कूलों में तो पहली व आठवीं कक्षा की किताबों का सेट छह से 10 हजार रुपये पड़ रहा है। उधर, प्रशासन और शिक्षा विभाग इस लूट पर चुप्पी साधे हुए हैं।

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इन दिनों सभी पुस्तक विक्रेताओं के यहां लंबी लाइनें लग रहीं हैं। चंडीगढ़ के अलावा मोहाली, पंचकूला, जीरकपुर, डेराबस्सी से परिजन बच्चों की किताबें खरीदने सेक्टर-19, 22 और 7 की चुनिंदा दुकानों पर पहुंच रहे हैं। स्कूलों द्वारा तय निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की किताबों से पांच गुना तक महंगी हैं। एनसीईआरटी की 256 पन्नों की एक किताब 65 रुपये की है जबकि निजी प्रकाशक की 167 पन्नों की किताब 305 रुपये में मिल रही है। अभिभावकों का भी यही सवाल है कि ऐसी कौन की किताबें स्कूल पढ़ा रहा है जो 500 से 600 रुपये में मिल रहीं हैं। इतनी महंगी तो बीए-एमए की किताबें भी नहीं आतीं।

उधर, शिक्षा विभाग कह रहा है कि महंगी किताबों को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है। आए भी कैसे, कोई भी अभिभावक अपने बच्चे के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहता क्योंकि शिकायत के बाद पुस्तक विक्रेता पर कार्रवाई हो न हो, स्कूल बच्चे पर जरूर कार्रवाई कर देगा। ऐसे में सवाल है कि क्या अधिकारियों को खुलेआम हो रही यह लूट दिखाई नहीं दे रही।

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केवल पांच नंबर के लिए लेनी पड़ रही 305 रुपये की किताब
सेक्टर-19 की एक दुकान पर कक्षा आठ की किताबें खरीदने आए एक अभिभावक ने बताया बच्चे की किताबों का सेट 5500 रुपये का मिला है। इसमें कई ऐसी पुस्तकें हैं जिन्हें स्कूल में केवल टर्म 1 की परीक्षा से पूर्व कुछ दिन के लिए पढ़ाया जाएगा। किताबें धूल खाती हैं। 305 रुपये की अंग्रेजी की कहानियों की किताब में से पेपर में केवल पांच अंकों का प्रश्न आता है, जिसे लेना मजबूरी है क्योंकि स्कूल ने सूची थमा दी है।

खुद अध्यापक हूं, स्कूलों की लूट को समझता हूं
शहर के एक नामी स्कूल की कक्षा-9 की किताबें खरीदने आए एक अभिभावक ने बताया विद्यालय अपनी मनमानी कर फिजूल की चीजें लेने के लिए मजबूर करते हैं। वह खुद एक अध्यापक हैं इसलिए स्कूल में उपयोग में लाई जाने वाली चीजों के बारे में जानते हैं। उन्होंने बताया एटलस, मानव मूल्य की पुस्तक, व्याकरण, कॉम्पैक्ट, ग्राफ बुक, आदि ऐसी चीजें है जो पूरे साल कहीं नहीं लगतीं, फिर भी लेनी पड़ती हैं क्योंकि स्कूल कहता है। 488 रुपये की कॉम्पैक्ट असाइनमेंट, 50 रुपये की ग्राफ बुक आदि लेते-लेते बिल हजारों में चला जाता है।

सीबीएसई के स्कूलों में भी निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ा रहे
किताबें लेने सेक्टर-19 की एक दुकान पर आए एक अभिभावक ने बताया उनकी बेटी की किताबें 4000 रुपये में आईं हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से होने के बावजूद बच्चों को एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबनें लेने को कहा जाता है। एनसीईआरटी की पुस्तकें तो हर दुकान में मिल जाती हैं पर निजी प्रकाशकों की किताबें लेने के लिए हमें निश्चित दुकान पर आना पड़ता है। कहीं और ये किताबें नहीं मिलतीं।

स्कूलों की मिलीभगत से चल रहा पूरा खेल
किताबें खरीदने पहुंचे एक अन्य अभिभावक ने बताया दुकान पर स्कूल का नाम बता दो और वह आपको पुस्तकों का पूरा सेट थमा देंगे। बिना स्कूल और पुस्तक विक्रेता की मिलीभगत के यह कैसे मुमकिन है कि एक दुकान पर तो स्कूल की एक भी पुस्तक नहीं मिलती, वहीं दूसरी ओर बताई गई दुकान दुकान पर स्कूल का नाम और कक्षा बता देने भर से सभी पुस्तकें मिल जातीं हैं। एक अन्य अभिभावक ने बताया प्रशासन में पुस्तकों की लूट को लेकर किसे संपर्क करें, हमें कोई अंदाजा नहीं। छुट्टी के दिन बच्चे की पुस्तकें लेने आते हैं और विभाग से शिकायत करनी होगी तो अलग से छुट्टी लेनी पड़ेगी। प्रशासन हमारी पहुंच से बाहर है।

किताबों में संशोधन करने की समय सीमा क्यों नहीं तय होती
एक अभिभावक ने बताया उनके दो बच्चे हैं। दोनों में एक साल का फर्क है। इसके बावजूद बड़े बेटे की किताबें छोटा बेटा प्रयोग नहीं कर पता क्योंकि हर साल किताबों में कोई न कोई बदलाव कर दिए जाते हैं। किताबों के कवर भी बदले होते हैं जिससे पता नहीं चल पाता कि यह पुरानी पुस्तक है या नई। पुस्तक के एक पन्ने के संशोधन के लिए नई किताब लेनी पड़ती है। इसकी कोई समय सीमा क्यों नहीं तय कि कितने समय के बाद पुस्तकों में संशोधन किया जाता है।
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कक्षा 8 की एनसीईआरटी की किताबों की कीमत
विज्ञान - 65 रुपये
गणित - 60 रुपये
सामाजिक विज्ञान - 65 रुपये

कक्षा 8 की निजी प्रकाशक की किताकों की कीमत
अंग्रेजी की कहानियों की किताब - 305 रुपये
द इंग्लिश चैनल - 495 रुपये
कॉम्पैक्ट असाइनमेंट - 488 रुपये

किस क्लास की किताबों का सेट कितने का
नर्सरी - 2611 से 4000 रुपये
केजी - 2625 से 4560 रुपये
एलकेजी - 3341 से 4500 रुपये
पहली कक्षा - 6000 - 8000 रुपये
दूसरी कक्षा - 3300 - 4500 रुपये
चौथी कक्षा - 7000 - 8000 रुपये
कक्षा 7 - 5600 - 9000 रुपये
कक्षा 8 - 8000 - 10000 रुपये
कक्षा 9 - 4000 - 8000 रुपये

अभिभावकों के हित में कुछ नहीं कर रहा प्रशासन
हर साल की तरह इस बार भी अभिभावकों का शोषण हो रहा है। स्कूल और निजी प्रकाशकों की दादागिरी पर प्रशासन भी चुप है और अभिभावकों के हित के लिए कुछ नहीं कर पा रहा। प्रशासन ने निर्देश जारी किए थे कि सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी, पर कोई भी निजी स्कूल इसका पालन नहीं कर रहा। सब अपनी मर्जी से प्राइवेट पब्लिशर की किताबों की सूची अभिभावकों को थमा रहे हैं। - नितिन गोयल, चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन अध्यक्ष

अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली
किताबों की खरीद को लेकर विभाग के पास कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। मेरा फोन नंबर विभाग की वेबसाइट www.chdeducation.gov.in पर उपलब्ध है। कोई भी परेशानी होने पर अभिभावक मुझे संपर्क कर सकते है। - हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक, चंडीगढ़
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