दुराचार मामले में फंसे पूर्व गृह सचिव एनके जैन मामले की सुनवाई के दौरान गवाह राम कौशल अपने बयानों से अदालत में पलट गया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह की अदालत में राकेश कौशल ने दर्ज बयानों में कहा कि एनके जैन ने उन्हें शेयर री-ट्रांसफर के लिए कभी नहीं धमकाया।
वह अपने बेटे के साथ कई बार मेरे घर आए थे, लेकिन उन्होंने कभी धमकी नहीं दी। साथ ही बयानों में कहा कि मुझे शेयर्स के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
इससे पहले पुलिस को दिए अपने बयानों में उन्होंने कहा था कि उन्हाेंने मामले में पीड़ित लड़की और सह-आरोपी रामलाल को घटना से पहले एक स्कोडा कार में देखा था।
इनके अलावा गवाह सुनील ने भी अदालत में बयान दर्ज करवाते हुए कहा कि अपहरण में इस्तेमाल गाड़ी को पुलिस ने बलदेव कुमार आरोपी से बरामद की थी।
सुनील ने कहा कि उन्होंने अपनी यह कार लीज पर आगे एक सह आरोपी को दी थी। पुलिस के मुताबिक पीड़ित के अपहरण में इस कार का इस्तेमाल किया गया था। मामले में इन तीन गवाहियों को दर्ज करने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 3 फरवरी की तारीख तय की है।
युवती ने लगाया था दुराचार का आरोप
हिमाचल स्थित शिमला निवासी युवती सेक्टर 33 के पैट्रोल पंप पर 14 अगस्त 2002 को बेहोशी की हालत में पड़ी हुई थी। पुलिस ने युवती को अस्पताल में दाखिल करवाया था।
होश आने पर युवती ने उद्योगपति एमके जैन सहित रामलाल, सुरेश शर्मा, बलदेव कुमार ओर हेड कांस्टेबल नरवीर सिंह पर दुराचार का आरोप लगाया था।
सेक्टर 34 थाना पुलिस ने मामले की छानबीन करके बाद सभी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मामले की जांच में खुलासा हुआ था कि उद्योगपति एमके जैन को मामले में फंसाया गया है।
छानबीन में बताया कि पूर्व गृह सचिव एनके जैन ने दुश्मनी के चलते उद्योगपति को फंसाया था। इसके बाद पुलिस ने एनके जैन पर मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। 2003 में पुलिस ने गैंगरेप, आपराधिक साजिश रचने की धाराओं के तहत चार्जशीट दायर की थी।
2010 में अदालत मामले में पूर्व गृह सचिव एनके जैन समेत रामलाल, सुरेश शर्मा, बलदेव कुमार ओर हेड कांस्टेबल नरवीर सिंह पर आरोप तय किए थे।