रोहतक के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंहल की अदालत ने दुष्कर्म के मामले में पानीपत के कालेखां निवासी बिजेंद्र को बरी कर दिया। अदालत ने जांच को लेकर पुलिस को भी फटकार लगाई। अदालत ने बिजेंद्र को पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया। यह मुआवजा सरकार को देना होगा।
अदालत ने अपने आदेश में पुलिस पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पुलिस ने सही तरीके से मामले की जांच पड़ताल नहीं की। फौरी तौर पर जांच पूरी कर दी गई। पुलिस की लापरवाही के कारण एक निर्दोष को जेल में रहना पड़ा। इतना ही नहीं, सुनवाई के लिए भी बार-बार अदालत के चक्कर लगाने पड़े।
उसकी समाज में बदनामी भी हुई। इसके बाद अदालत ने कहा कि पुलिस को बड़े गंभीरता से मामलों की जांच करनी चाहिए, ताकि निर्दोष बेवजह न फंसे। अदालत में चले अभियोग के अनुसार पानीपत की एक महिला ने पुलिस को शिकायत दी थी।
इसमें महिला ने मेडिकल मोड़ से अपहरण कर दिल्ली ले जाने और दुष्कर्म करने के आरोप लगाए थे। जब मामले की जांच की गई तो पता चला कि वारदात वाले दिन 16 अक्तूबर 2013 को महिला की लोकेशन दिल्ली के सरोजनी नगर की थी।
बिजेंद्र उस दिन बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती था। इस तरह के सवाल कोर्ट में भी उठाए गए। इतना ही नहीं, आरोप लगाने वाली महिला कोर्ट में खुद गवाही देने ही नहीं आई थी। अदालत ने पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया।