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पंजाबः बादल को बड़ा झटका, अकाली दल दो फाड़, दो दिन में होगा नई पार्टी और नेताओं का एलान

Mon, 03 Dec 2018 09:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर( पंजाब)
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सांसद रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा
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पिछले 50 साल से पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ कंधे से कंधा मिलकर काम करने वाले सांसद रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने रविवार को नए अकाली दल के गठन की घोषणा कर दी। इसके साथ ही अकाली दल (बादल) दोफाड़ हो गया। रविवार को अपने निवास स्थान पर मीडिया से बातचीत में ब्रह्मपुरा ने बताया कि नए दल का नाम शिरोमणि अकाली दल ही होगा। 1920 में  बने अकाली दल के संविधान के अनुसार पार्टी का संचालन किया जाएगा। 

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नया अकाली दल फेडरल ढांचे के अनुसार काम करेगा। अकाली दल का 99वां स्थापना दिवस 14 दिसंबर को मनाया जा रहा है। इसी दिन नए अकाली दल के ढांचे की घोषणा कर दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल का संविधान बादल परिवार ने अपनी सुविधा के अनुसार बदला है। नया अकाली दल संविधान में वही परिवर्तन करेगा जो वर्तमान समय के अनुसार ठीक होंगे। 

उन्होंने कहा कि वर्तमान अकाली दल बादल परिवार की जागीर बन चुका है। उनका अकाली दल 1920 के अकाली दल के सिद्धांतों को आधार बनाकर आगे बढ़ेगा। जब तक अकाली दल की पुरानी साख बहाल नहीं हो जाती, तब तक नया अकाली दल चैन से नहीं बैठेगा। ब्रह्मपुरा ने पंजाब के सभी सिख संगठनों, संप्रदायों के साथ साथ आम आदमी पार्टी से बागी हुए सुखपाल सिंह खैरा, बैंस बंधुओं को अपने साथ आने की अपील करते हुए याद करवाया कि खैरा के पिता सुखजिंदर सिंह ने उनके साथ काम किया हुआ है।
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 ब्रह्मपुरा ने दावा किया कि वर्तमान अकाली दल के कई लीडर उनके संपर्क में हैं। नए अकाली दल के ढांचे के निर्माण के बाद बादल परिवार का अकाली दल बिखर जाएगा। उन्होंने कहा कि अकाली दल के संविधान और अकाली दल के झंडे को स्वीकार करने वाले नए अकाली दल में शामिल किए जाएंगे। अलगाववादी नेता सिमरनजीत सिंह मान भी यदि अकाली दल के संविधान को मानेंगे तो उनका स्वागत है। बरगाड़ी में बैठे सिख समाज के लोगों को भी नए अकाली दल में स्थान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी दो दिनों के भीतर नए अकाली दल के नाम के साथ किसका नाम होगा, उसकी घोषणा कर दी जाएगी।

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सुखबीर और मजीठिया की क्या औकात, जो हमसे बात करें

इस अवसर पर पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां ने कहा कि कुर्बानियों से बना अकाली दल अमीर लोगों की पार्टी बन कर रह गया है। बादल ने 1997 में पंजाब की सत्ता संभालते ही संविधान में कई परिवर्तन कर दिए। वर्तमान अकाली दल सिख जनमानस की राजनीति पार्टी नहीं रही। पूरा पंजाब वर्तमान अकाली दल के विरोध में खड़ा है। बादल परिवार ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का सियासीकरण कर दिया है। 

अकाल तख्त की मान-मर्यादा को चोट पहुंचाई है। सेखवां ने अकाली लीडर पर तंज कसा कि सुखबीर बादल, बिक्रम मजीठिया और अन्य अकाली लीडर्स की औकात नहीं है कि वह हमसे सवाल करें। प्रकाश सिंह बादल बात करें, उनको जवाब दिया जाएगा। अकाली दल को बादल परिवार से मुक्त करवाना ही हमारा उद्देश्य है। इस दौरान रविंदर सिंह ब्रह्पुरा और अमर पाल सिंह बोनी भी उपस्थित थे।

बादल और कैप्टन परिवार की राजनीतिक सांझ
सेखवां ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में नया अकाली दल भाग लेगा या नहीं, इसके बारे में बाद में फैसला किया जाएगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और बादल परिवार के बीच राजनीतिक सांझ है। दोनों परिवार एक दूसरे का राजनीतिक नुकसान नहीं करेंगे। उन्होंने आशंका प्रकट की कि आगामी विधानसभा चुनाव बादल परिवार और कैप्टन परिवार मिलकर लड़ेंगे।

बादल के विरुद्ध हुए टकसाली : डॉ. राजकुमार
विधायक डॉ. राजकुमार ने कहा कि अकाली दल टूट गया है। टकसाली अकाली बादल परिवार से छुटकारा पाना चाहते है। बादल को चाहिए कि अब वह अकाली दल से इस्तीफा दे कर घर बैठ जाएं। 

बागियों का कोई आधार नहीं : वल्टोहा
अकाली दल के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक विरसा सिंह वल्टोहा ने कहा कि सत्ता का आनंद मानने वाले ब्रह्मपुरा का कोई राजनीतिक आधार नहीं है। 2012 में जब अकाली दल ने दूसरी बार पंजाब में सरकार बनाई थीं, तब ब्रह्मपुरा चुनाव हार गए थे। सेवा सिंह सेखवां चार बार विधानसभा का चुनाव हार चुके है। 
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