साध्वी रेप केस में 20 साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को कोई काम नहीं करना आता, इसलिए वह अब जेल में मजदूरी करेगा। राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में कैदी नंबर 8647 बन गए हैं।
डेरे में शानो-शौकत और ऐशो-आराम की ज़िंदगी बिताने वाले गुरमीत सिंह को जेल में सिर्फ वही सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, जो दूसरे कैदियों को मिलती हैं। राम रहीम को सश्रम कारावास की सजा दी गई है, लेकिन जीविका चलाने के लिए किसी भी काम में निपुण नहीं होने के कारण राम रहीम को जेल में माली का काम सौंपा जा सकता है।
राम रहीम को जेल में दो जोड़ी खादी का कुर्ता-पायजामा, 2 सफेद चद्दर, 2 कंबल, एक प्लेट, चाय का मग ही मिलेगा। उसे कोई गद्दा या बिस्तर नहीं मिलेगा, बल्कि जमीन पर कंबल बिछाकर ही सोना पड़ेगा।
शुरुआत के दिनों में हल्का काम कराया जाएगा
राम रहीम
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राम रहीम को जेल और अपनी बैरक में झाड़ू लगाने के अलावा बैरक में पौछा भी लगाना पड़ेगा। शुरुआत के दिनों में राम रहीम से हल्का काम कराया जाएगा। सुबह 7.30 बजे नाश्ते के लिए लाइन में लगना पड़ेगा। नाश्ते में राम रहीम को चाय, दूध और ब्रेड दी जाएगी। इसके बाद सुबह 8.30 निर्धारित काम कराया जाएगा।
जेल के नियमों के मुताबिक राम रहीम के वकील भी उससे मिल सकेंगे। 5 से 6 बजे कैदियों के साथ हॉल में बैठकर भजन गाना होगा। रात 8 बजे राम रहीम को खाना मिलेगा। इसमें रोटी और सब्जी परोसी जाएगी। रविवार को बतौर स्वीट डिश खीर मिलेगी। रात 9 बजे सोने के लिए बैराक में बंद कर दिया जाएगा।
राम रहीम का हफ्ते में 'मुलाजा' दिवस होगा, इसका मतलब यह है कि कल जेल अधिकारी उसके गुनाहों और अन्य चीजों के बारे में सारा विवरण एक जेल रजिस्टर में दर्ज करेंगे। उसे हफ्ते में सिर्फ एक बार बाहर के किसी व्यक्ति से मिलने का अवसर मिल सकेगा।
जेल में इस तरह मिलता है काम और मजदूरी
राम रहीम सजा
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जेल में तीन श्रेणियों में कैदियों को काम दिया जाता है। इसी के तहत राम रहीम को माली का काम सौंपा जाएगा। दरअसल, जेल में कैदियों को तीन श्रेणियों के तहत काम के लिए चुना जाता है। पहली श्रेणी के तहत यदि कोई कैदी पहले से ही किसी काम को करने में निपुण है, जैसे बाल काटना, पेंटिंग बनाना सहित अन्य। ऐसे में जेल के नियमानुसार कैदी को वह काम ही दिया जाता है जिसमें वह निपुण होता है।
इसकी एक दिन की मजदूरी 40 रुपये होती है। दूसरी श्रेणी में ऐसे कैदी होते हैं जिन्हें कोई काम थोड़ा थोड़ा आता है। उसे ज्यादा सिखाने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे कैदी को वह काम ही दिया जाता है, जिसके बारे में उसे पता होता है। इसके लिए कैदी को एक दिन की 35 रुपये मजदूरी मिलती है। तीसरी श्रेणी में उन कैदियों को शामिल किया जाता है जिन्हें जीविका चलाने के लिए कोई भी काम नहीं आता।
ऐसे कैदी को घास काटने, पौधों में पानी डालने सहित मजदूरी के काम में लगा दिया जाता है। इन्हें एक दिन में 20 रुपये मजदूरी मिलती है। अब मखमली गद्दों पर सोने वाले राम रहीम को कोई भी ऐसा काम नहीं आता है, जिसे वह जेल में कर सके। वह नियमानुसार तीसरी श्रेणी में आता है। ऐसे में उसे मजदूरी करके ही गुजारा करना पड़ेगा। एक दिन की मजदूरी के लिए उसे 20 रुपये मेहनताना मिलेगा।