सूत्रों के मुताबिक, बुलेट प्रूफ होने के कारण गाड़ी का वजन बहुत ज्यादा था, जिसके कारण यह तेज नहीं दौड़ पाती थी। सुरक्षा काफिले में गाड़ी पीछे न रह जाए, इसलिए इसे 30 से 40 की स्पीड पर दौड़ाया जाता था।
पंचकूला में लोकल ही कही जाने के लिए तो गाड़ी से काम चलता था, लेकिन यदि बाहर जाना हो तो गाड़ी के साथ चलना मुश्किल होता था। सुरक्षा कारणों से भी देखा जाए तो यह गाड़ी मुफीद नहीं बैठ रही थी। तंग आकर गाड़ी को किनारे कर दिया गया।
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सूत्र बताते हैं कि गाड़ी के साथ जज साहब ने सरकारी ड्राइवर को भी अलविदा कह दिया है। मालूम हो कि इस मामले में पूर्व डीजीपी बीएस संधू सहित कुछ गवाहों को भी पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाई गई है। समय-समय पर सरकार की ओर से इस सुरक्षा का रिव्यू किया जाता है।