राज्यपाल कलराज मिश्र को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि इतिहास की इन पुस्तकों में हम अपने बच्चों को गलत जानकारी दे रहे हैं। जैसा कि मुझे बताया गया है, कक्षा-10वीं की पुस्तक के अध्याय राजस्थान का इतिहास और संस्कृति में महाराणा उदयसिंह द्वितीय को बनवीर का हत्यारा दर्शाया गया है और यह साबित किया गया है कि महाराणा उदयसिंह ने यह कृत्य मेवाड़ पर कब्जा करने के लिए किया था। जबकि सही तथ्य यह है कि असली साजिश बनवीर ने रची थी। इसी तरह विश्व प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध के तथ्यों को भी गलत लिखा गया है। मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप और उदयसिंह द्वितीय के बारे में प्रकाशित इन गलत तथ्यों के चलते मेवाड़ के लोगों में भारी आक्रोश है।
महाराणा के बारे में गलत क्यों पढ़ाया जा रहा?
मेवाड़ के कई जनप्रतिनिधि भी इस बदलाव के विरोध में उतर आए हैं। उनका कहना है कि महाराणा प्रताप के बारे में गलत क्यों पढ़ाया जा रहा है? यह सीधा-सीधा मातृभूमि की आन-बान-शान के लिए अपने प्राण देने वाले महाराणा प्रताप और महाराणा उदयसिंह की छवि को खराब करने का प्रयास है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इन पुस्तकों में से महाराणा प्रताप के पुत्र द्वारा अब्दुल रहीम के परिवार की स्त्रियों को बंदी बनाकर लाने पर महाराणा के नाराज होने तथा उन्हें वापस सकुशल शिविर में छोड़कर आने के आदेश के प्रसंग को भी हटा दिया गया है।
पंजाब में हो रहा है महाराणा प्रताप पर शोध
बदनौर ने राजस्थान के राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि महान योद्धा महाराणा प्रताप राष्ट्रीय गौरव हैं। उनकी जयंती पर पंजाब में राज्यस्तरीय महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। मेरी अनुशंसा पर पंजाब सरकार ने 2017 में पंजाबी विवि पटियाला में महाराणा प्रताप चेयर स्थापित की है। यहां महाराणा प्रताप पर शोध हो रहा है। पंजाब-राजस्थान के इतिहासकार अपने तथ्यों का आदान-प्रदान करने के लिए इस मंच का उपयोग कर सकते हैं। मुझे चिंता यह है कि ऐतिहासिक तथ्य गलत पढ़ाए जाएंगे तो बच्चे महाराणा प्रताप के जीवन से क्या प्रेरणा लेंगे?