हरियाणा से राज्यसभा के लिए चुनावी सरगर्मियां तेज है। कांग्रेस व भाजपा नेता जहां राज्यसभा की टिकट के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। वहीं ये नेता दिल्ली में अपने आकाओं के दरबार में अपनी लॉबिंग में भी जुटे हैं। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने को दो दिन शेष रह चुकेहैं। मगर अभी तक किसी ने भी नामांकन नहीं भरा है।
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उल्लेखनीय है कि हरियाणा से राज्य सभा के द्विवार्षिक चुनावो के अंतर्गत दो नियमित सीटों और एक उपचुनाव की सीट के निर्वाचन के लिए चुनावी प्रक्रिया जारी है। 13 मार्च तक उम्मीदवारों द्वारा नामांकन भरे जा सकेंगे। दो नियमित सीटों के लिए निर्धारित छह वर्ष की अवधि 10 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 तक है। जबकि एक सीट, जो इस वर्ष 20 जनवरी को बीरेंद्र सिंह के त्यागपत्र के कारण रिक्त हुई है, का कार्यकाल 1 अगस्त 2022 तक है।
इसलिए उक्त दोनों प्रकार की सीटों के निर्वाचन के लिए अलग अलग नोटिफिकेशन जारी की गई है। इनके लिए निर्वाचन प्रक्रिया भी अलग होगी। 13 मार्च को उक्त तीनों सीटों के नामांकन भरे जाने हैं। नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन यानी आगामी 18 मार्च को ही उन तीनों उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित कर देंगे, अगर उम्मीदवारों की संख्या अधिक होती है, तो 26 मार्च को मतदान होगा।
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सुल्तान, बीरेंद्र सिंह तीन बार रहे चुके राज्यसभा सदस्य
राज्यसभा सदस्यों के इतिहास पर नजर डालें तो हरियाणा के पांच मुख्यमंत्री ऐसे भी हैं, जो राज्यसभा की दहलीज तक पहुंचे हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा, भजन लाल, बनारसी दास गुप्ता, ओमप्रकाश चौटाला व देवीलाल शामिल है। उधर, सबसे अधिक तीन बार सुल्तान सिंह और चौधरी बीरेंद्र सिंह राज्यसभा सदस्य रहे चुके हैं। मामले के जानकार एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि सुल्तान सिंह लगातार 16 वर्ष तक राज्यसभा सदस्य रहे थे।
वह 31 मार्च 1970 से 1 अगस्त 1974 तक, फिर 2 अगस्त 1974 से 1 अगस्त 1980 तक और फिर 2 अगस्त 1980 से 1 अगस्त 1986 तक लगातार तीन बार कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा गए। जबकि चौधरी बीरेंद्र सिंह 1 अगस्त 2010 से 28 अगस्त 2014 तक कांग्रेस की ओर से, 29 नवंबर 2014 से 1 अगस्त 2016 तक भाजपा की ओर से व 2 अगस्त 2016 से फिर भाजपा की ओर से राज्यसभा पहुंचे। 20 जनवरी 2020 को उन्होंने अपने कार्यकाल दौरान फिर राज्यसभा सदस्य्ता से फिर त्यागपत्र दे दिया था। उनका कुल कार्यकाल साढ़े नौ वर्ष ही रहा है.
ताऊ के परिवार के चार सदस्य भी राज्यसभा पहुंचे
पूर्व सीएम एवं उप प्रधानमंत्री ताऊ देवी लाल परिवार के कुल चार सदस्य हरियाणा से राज्यसभा सदस्य रहे हैं। सबसे पहले जनता दल से पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला 14 अगस्त 1987 से 9 अप्रैल 1990 तक, फिर उनके भाई रणजीत सिंह चौटाला जो आज हरियाणा में बिजली मंत्री हैं 12 सितंबर 1990 से 1 अगस्त 1992 तक, फिर खुद ताऊ देवी लाल 2 अगस्त 1998 से 6 अप्रैल 2001 तक। अजय सिंह चौटाला 2 अगस्त 2004 से 3 नवंबर 2009 तक राज्यसभा के सदस्य रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा 2 अगस्त 1968 से 1 अगस्त 1974 तक, भजन लाल 2 अगस्त 1986 से 27 नवंबर 1989 तक, बनारसी दास गुप्ता 10 अप्रैल 1996 से 9 अप्रैल 2002 तक, सुषमा स्वराज 10 अप्रैल 1990 से 9 अप्रैल 1996 और उनके पति स्वराज कौशल 2 अगस्त 1998 से 1 अगस्त 2004 तक हरियाणा से राज्य सभा सदस्य रहे।
उधर, हरियाणा के दो बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित सदस्यों में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति रहे कृष्ण कांत 29 नवंबर 1966 से 2 अप्रैल 1972 तक, 10 अप्रैल 1972 से 20 मार्च 1977 तक, जनसंघ के सुजान सिंह 13 जुलाई 1977 से 9 अप्रैल 1978 तक, फिर 10 अप्रैल 1978 से 9 अप्रैल 1984 तक, कांग्रेस के मुख्त्यार सिंह मालिक पहले 6 अप्रैल 1967 से 2 अप्रैल 1968 तक व 10 अप्रैल 1984 से 9 अप्रैल 1990 तक सांसद रहे है।
कांग्रेस के ही हरि सिंह नलवा 19 मार्च 1980 से 2 अप्रैल 1982 तक व 3 अप्रैल 1982 से 2 अप्रैल 1988 तक, कांग्रेस के रामजीलाल पहले 2 अगस्त 1992 से 17 मई 1993 तक व 3 अप्रैल 1994 से 2 अप्रैल 2000 तक, भूपिंद्र हुड्डा सरकार दौरान पहले कांग्रेस के राम प्रकाश 23 मार्च, 2007 से 9 अप्रैल 2008 व 10 अप्रैल 2008 से 9 अप्रैल 2014 तक, शादी लाल बतरा 4 अगस्त 2009 से 2 अप्रैल 2012 तकर 3 अप्रैल 2012 से 2 अप्रैल 2018 तक राज्यसभा सांसद रहे है।