नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पड़पौत्री राजश्री का कहना है कि कि वर्ष 1945 में हुए एक हादसे में नेताजी लापता हो गए और आज तक देश की कोई भी सरकार यह पता नहीं लगा पाई कि वे कहां गए। इतिहास में इस हादसे के दौरान उनकी मौत की बात दर्ज है, लेकिन इस बात के किसी के पास साक्ष्य नहीं हैं। ऐसे में सरकार को इतिहास में नेताजी की मृत्यु की जगह उनके लापता होने की बात लिखवानी चाहिए।
राजश्री बोलीं- देश का संविधान ब्रिटिश राज के अनुसार लिखा गया है। इस संविधान में काफी कमियां हैं और इसी का परिणाम है कि इसमें अब तक सौ से अधिक बदलाव किए जा चुके हैं। असल में आज भारत का संविधान भारत की संस्कृति और सभ्यता के अनुसार फिर से लिखे जाने की जरूरत है।
वे नेताजी जन कल्याण संगठन की ओर से जाट धर्मशाला में आयोजित जन अधिकार सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेने के लिए पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि देश को आजादी के समय पूर्ण रूप से आजाद नहीं किया गया। सिर्फ शक्तियों का हस्तांतरण किया गया। आज भी भारत कॉमनवेल्थ का सदस्य है और कॉमनवेल्थ देशों का सरताज ब्रिटेन का राजा या महारानी ही होता है।
देश के समृद्ध विकास के लिए जितना जल्द हो सके, उतना जल्द देश को कॉमनवेल्थ एसोसिएशन से अलग होना पड़ेगा। इस मौके पर नेताजी जन कल्याण संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुमेर सांगवान, जिला अध्यक्ष अंजनी शर्मा, सतपाल, हरिओम शर्मा, विनय शर्मा, शमशेर, एसएन टेलटिया आदि मौजूद रहे।
नेताजी के जीवन की महत्वपूर्ण फाइलें गायब
उन्होंने कहा कि वर्तमान मोदी सरकार ने नेताजी के जीवन की छुपी सच्चाइयों को सामने लाने के लिए उनसे जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक किया है, लेकिन उनके जीवन की बहुत सी महत्वपूर्ण फाइलें उनमें से गायब हैं। सुभाषचंद्र बोस से नेताजी बनने की उनकी जीवन गाथा का उन फाइलों में कहीं जिक्र नहीं है। भारत के इतिहास में नेताजी के बारे में कुछ ज्यादा नहीं लिखा गया।