गौरतलब है कि सुधार अनाज मंडी से आसपास के लगभग 70 गांव लगते हैं। यहां के आढ़ती लंबे समय से इसे पक्का करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार ने इस मंडी को पूरा पक्का नहीं किया है। सोमवार को बरसात के कारण यहां मंडी में पड़ा लगभग दो हजार बोरी गेहूं भीग गया। 150 क्विंटल खुले में पड़ा गेहूं भी भीग चुका है। वहीं लुधियाना की गिल रोड स्थित अनाज मंडी में बरसात के कारण अव्यवस्था का माहौल साफ देखने को मिला। बारिश के बीच किसान खुद अपनी फसल को बचाने के लिए तिरपाल का इंतजाम करते दिखे।
जालंधर: मंडियों में भीग रही किसानों की मेहनत की कमाई
बारिश और आंधी ने किसानों को परेशान कर रखा है। बारिश के कारण जिले की कई मंडियों में पड़ी किसानों की फसल भीग गई है। हालांकि इस बारिश से खेतों में खड़ी फसल को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है लेकिन कई स्थानों पर तेज आंधी ने फसलों को गिरा दिया है। जालंधर की दाना मंडी की बात करें तो इस मंडी में किसानों की फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
इसका मुख्य कारण यह है कि यहां अब तक ज्यादा फसल की आवक नहीं हुई है। ज्यादा फसल न आने के कारण मंडियों में किए गए तिरपाल के इंतजाम ने इस फसल को बचा लिया है लेकिन जमीन के नीचे से पानी जाने से फसल में नमी कुछ बढ़ गई है। वहीं जमशेर की दाना मंडी में खुले में पड़े गेहूं को नुकसान हुआ है। किसान सुखवीर सिंह का कहना है कि मंडी में फसल को बारिश से बचाने के इंतजाम नहीं हैं। बारिश के कारण इस मंडी में फसल लाने वाले किसानों का नुकसान हो रहा है।
गेहूं की फसल खेतों में तैयार खड़ी है लेकिन किसानों को इस फसल की कटाई के लिए लेबर नहीं मिल रही है। उस पर किसानों ने कोरोना के डर से फसल को गीला ही काटना शुरू कर दिया है। किसानों में इस बात को लेकर डर सता रहा है कि कहीं कोरोना के बढ़ते खौफ के कारण फसलों की खरीद बंद न हो जाए। इसी के चलते किसान मंडी में 14 से 15 नमी वाली फसल भी ला रहे हैं। बारिश के कारण फसल की नमी और बढ़ रही है।
पटियाला: तेज हवा से खेत में गिरी फसल, मंडियों में भीगा गेहूं
सोमवार शाम तेज आंधी के बाद हुई बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल गिर गई। वहीं मंडियों में पानी भर जाने से गेहूं भीग गया। किसानों ने इस नुकसान के लिए सरकार से 200 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजे की मांग की है। पटियाला में दो-तीन दिन से मौसम का मिजाज रह-रहकर बिगड़ रहा है।
सोमवार शाम को भी अचानक आसमान में बादल छा गए। आंधी के साथ तेज बारिश होने लगी। कई जगह ओलावृष्टि भी हुई। ऐसे में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल गिर गई हैं। आंकड़ों के मुताबिक पटियाला में इस समय 25 फीसदी गेहूं की फसलें खेतों में खड़ी हैं। किसानों ने रोष जताया है कि अगर सरकार उन्हें रात के समय भी कंबाइन चलाने की अनुमति दे देती तो शायद उनका इतना नुकसान नहीं होता। किसानों ने इसके बदले में सरकार से मुआवजे की तुरंत मांग की है। उधर मंडियों में भी पानी भरने से गेहूं भीग गया है।