चंडीगढ़। ट्रेन रद्द होने के बावजूद पूरा रिफंड न देना भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दोनों को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी मानते हुए पांच हजार रुपये हर्जाना अदा करने के आदेश दिए हैं। साथ ही 2,095 रुपये की टिकट राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सेक्टर-45 के रहने वाले भारतेंदु सूद और उनकी पत्नी ने अगस्त 2024 में आईआरसीटीसी के माध्यम से मडगांव से यात्रा के लिए टिकट बुक कराई थी। 17 अगस्त को उन्हें ट्रेन रद्द होने का संदेश मिला जिसके चलते उन्होंने वैकल्पिक ट्रेन से सफर किया। हालांकि बाद में संबंधित ट्रेन निर्धारित समय पर ही चल दी लेकिन इसकी जानकारी उन्हें समय पर नहीं मिली।
जब शिकायतकर्ताओं ने रिफंड मांगा तो उन्हें पूरा भुगतान देने के बजाय आंशिक राशि ही लौटाई गई। रेलवे और आईआरसीटीसी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ट्रेन रद्द नहीं हुई थी। मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने शिकायत को सही ठहराते हुए पूरा रिफंड, ब्याज और मुआवजा देने का आदेश जारी किया।