हरियाणा को रेल बजट से उम्मीद तो जगी, लेकिन हर बार यहां के लोगों को मायूसी का ही सामना करना पड़ा। इस बार फिर 26 फरवरी को पेश होने वाले रेल बजट में हरियाणा को प्रभु कृपा की उम्मीद है।
इससे पहले प्रदेश में नई रेल लाइनों के लिए सर्वे के अलावा योजनाओं का खाका तो तैयार किया गया, मगर इसमें से ज्यादातर अब भी लंबित हैं। कुछ सर्वे तो शुरू ही नहीं हुए।
वहीं जो सर्वे पूरे हुए उन पर काम शुरू होने की नौबत नहीं आई। पिछले साल मोदी सरकार ने जुलाई में पेश रेल बजट में हरियाणा में पलवल के रास्ते नई दिल्ली और अलीगढ़ के लिए इलेक्ट्रिक ट्रेन का प्रस्ताव लाया गया। उस समय देश को दी गई केवल दो ईएमयू, बंगलूरू-रामनगरम और दिल्ली-पलवल-अलीगढ़ भी हरियाणा से होकर गुजरने वाली थी।
बजट में बीकानेर-रेवाड़ी नई ट्रेन, बठिंडा-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस और नई दिल्ली-चंडीगढ़ ट्रेनों से हरियाणा को राहत दी गई। अमृतसर-सहरसा जनसाधारण एक्सप्रेस भी हरियाणा से ही होकर गुजरी।
रेवाडी-महेंद्रगढ़ रेललाइन के दोहरीकरण की बात हुई, लेकिन सोनीपत के लिए मंजूर रेल कोच कारखाने, यमुनानगर से चंडीगढ़, गुड़गांव से अलवर वाया नूंह, हिसार से जाखल वाया अग्रोहा, रोहतक से हांसी वाया महम जैसे पहले से पारित प्रस्तावों को अनदेखा कर दिया गया।
पिछले साल के कई प्रोजेक्ट लटके
पिछले कई रेल बजटों में हरियाणा के लिए घोषित अनेक रेल प्रोजेक्टों पर आज तक काम शुरू नहीं हुआ है। पिछले रेल बजट में कैथल से करनाल रूट का सर्वे तो किया गया, लेकिन लाइन बिछाने का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
इसी तरह हिसार से नरवाना वाया सकलाना के 29 किलोमीटर लंबे ट्रैक और जींद से हांसी वाया नारनौंद 45 किलोमीटर लंबे ट्रैक के लिए पिछले बजट में सर्वे को मंजूरी दी गई, लेकिन इसके लिए धनराशि का आवंटन आज तक नहीं किया गया।
यही हालत चंडीगढ़ से नारायणगढ़-सढौरा-यमुनानगर-देहरादून रेल लाइन को कुरुक्षेत्र तक लाने के प्रस्ताव को पिछले रेल बजट में ही मंजूरी मिल गई थी। फिर भी अब तक कोई प्रगति नहीं हुई।
कैथल में नए रेलवे स्टेशन के निर्माण कार्य मई, 2014 में शुरू तो किया गया, लेकिन आज तक न तो इस स्टेशन पर कोई ट्रेन रुकी और न ही टिकट काउंटर खुला।
रेल बजट में हरियाणा को प्रभु कृपा का आसरा
केंद्र की भाजपा सरकार के पहले रेल बजट में हरियाणा को रेल बजट के नाम पर अधिक कुछ नहीं हासिल हुआ था। इस बजट में सिर्फ दो नई रेल लाइनों का सर्वे हासिल हुआ था। हरियाणा में इस समय भाजपा के सात सांसद हैं। जिसमें से दो केंद्रीय राज्य मंत्री हैं।
पूर्व में सांसद दीपेंद्र हुड्डा रेल बजट को लेकर हरियाणा की तरफ से कांग्रेस सरकार में जोरदार पैरवी करते रहे हैं। लिहाजा इस बार हरियाणा को रेल बजट में नई रेलगाड़ियां झटक कर दिखानी होंगी।
कंपनी बनाकर काम पूरे करने का फैसला
हरियाणा की खट्टर सरकार ने अब प्रदेश से जुड़े पेंडिंग रेल प्रोजेक्टों को रफ्तार देने के लिए रेलवे से हाथ मिलाने का फैसला किया है। इसके तहत दोनों एक कंपनी पंजीकृत कराएंगे, जिसका नाम रेल आधारभूत संरचना विकास कंपनी (हरियाणा) लिमिटेड होगा।
मुख्यमंत्री खट्टर इस प्रायोजन को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस संयुक्त उद्यम के अंतर्गत लंबित रेल प्रोजेक्टों की कुल लागत का आधा हिस्सा हरियाणा सरकार और आधा रेल मंत्रालय देगा।