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Punjab: खालिस्तान की मांग खतरे की घंटी, अजनाला थाने पर हमले से पंजाब की कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

Sun, 26 Feb 2023 02:31 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

पंजाब की सिख राजनीति में भी एक नया मंथन दिख रहा है। कट्टरपंथी तत्वों के उदय से पंजाब में जमीन के भीतर खालिस्तान की मांग को लेकर करंट पैदा हो रहा है, जो खतरे का संकेत है। खालिस्तान की मांग करने वाले नेता सिमरनजीत सिंह का संगरूर उपचुनाव जीतना व अमृतपाल सिंह का पंजाब में उभरना इसकी कड़ी का नतीजा है।
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अमृतपाल सिंह। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के नेतृत्व में अजनाला थाने पर हमले की घटना के बाद पंजाब की कानून-व्यवस्था पर तो सवाल उठ ही रहे हैं, साथ ही यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि ऐसी घटनाओं की आड़ में खालिस्तान की मांग का तेज होना राज्य के लिए खतरे की घंटी है। कट्टरपंथियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आगे चल कर स्थिति खराब हो सकती है। अजनाला की घटना को लेकर अब तक एफआईआर दर्ज न होने से पुलिस भी सवालों के घेरे में है।

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वहीं, पंजाब की सिख राजनीति में भी एक नया मंथन दिख रहा है। कट्टरपंथी तत्वों के उदय से पंजाब में जमीन के भीतर खालिस्तान की मांग को लेकर करंट पैदा हो रहा है, जो खतरे का संकेत है। खालिस्तान की मांग करने वाले नेता सिमरनजीत सिंह का संगरूर उपचुनाव जीतना व अमृतपाल सिंह का पंजाब में उभरना इसकी कड़ी का नतीजा है। इस कट्टरपंथ को विदेश से पूरी हवा दी जा रही है। हाल ही में कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके में खालिस्तान के समर्थन में आंदोलन देखने को मिले हैं, जिसका पूरा प्रभाव पंजाब में हो रहा है।

पंजाब के लिए चिंता की बात इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि राज्य की 553 किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान से सटी है। पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा देने और खालिस्तान की मांग करने वाले कई लोग पाकिस्तान में शरण लिए बैठे हैं। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये भेजे जा रहे हथियार भी पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। वहीं, अजनाला जैसी घटनाओं से यह चुनौती और बढ़ गई है।
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पंजाब का माहौल खराब नहीं होने देंगे: डीजीपी
डीजीपी गौरव यादव का कहना है कि पंजाब पुलिस बहादुर फोर्स है। किसी भी सूरत में राज्य का माहौल बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। ऐसे लोगों को सिर उठाने नहीं दिया जाएगा, जो पंजाब की शांति के लिए खतरा हों। पंजाब की पुलिस हर तरह की कार्रवाई में सक्षम है।

ताजा घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

  • नवंबर, 2022: अमृतसर में शिवसेना नेता सुधीर सूरी की हत्या कर दी गई। सुधीर खालिस्तान समर्थकों का खुला विरोध करते थे। इस वजह से कई सालों से वह उनके निशाने पर थे।
  • 6 जून, 2022: अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में खालिस्तान समर्थक जमा हुए। उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार की 38वीं बरसी मनाई। इस कार्यक्रम में खालिस्तान समर्थक नारे लगाए गए और जरनैल सिंह भिंडरांवाले के पोस्टर भी लहराए गए।
  • 9 मई, 2022: पंजाब पुलिस के मोहाली स्थित इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर में रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) से हमला हुआ था।
  • जून, 2022: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे दिलावर सिंह का फोटो अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब के अंदर केंद्रीय सिख संग्रहालय में लगाया गया।
  • पिछले एक साल में पंजाब में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे गए, जिसमें सरकारी कार्यालय से लेकर अधिकारियों की कोठियां, देवी तालाब मंदिर से लेकर पीएपी की दीवार भी थी।
  • 30 अप्रैल, 2022: एसएफजे के आतंकी गुरपतवंत पन्नू ने खालिस्तान स्थापना दिवस मनाने का एलान किया। इसके बाद पटियाला में खालिस्तान समर्थकों और शिवसेना कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।
  • 8 मई, 2022: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बाहर खालिस्तान के झंडे लगाए गए। दीवारों पर खालिस्तान जिंदाबाद के नारा भी लिखा मिला था।
  • 13 मई, 2022: रोपड़ के मिनी सचिवालय के दीवारों पर खालिस्तान जिंदाबाद और पंजाब मांगे आजादी का नारा लिखा मिला था।
  • 13 जून, 2022: फरीदकोट के सेशन जज के घर पर संदिग्धों ने खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिख दिए।
  • 29 सितंबर, 2022 होशियारपुर में एक रैली में वारिस दे पंजाब के कार्यकर्ताओं ने खालिस्तान-पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए।
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