प्रशासन की ओर से गठित एडवाइजरी काउंसिल के गठन के एक दिन बाद ही उस पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के साथ- साथ भाजपा के नेता भी सवाल उठा रहे हैं। भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने इसको शहर के लिए मजाक बताया है। उन्होंने कहा है कि काउंसिल का गठन करके सिर्फ एक लीपापोती की गई है जबकि इसके पास कोई अधिकार नहीं है।
उनका कहना है कि सविधान के 74 वें संशोधन के अनुसार मेट्रो प्लानिंग और जिला प्लानिंग कमेटी का गठन होना चाहिए, जिसका प्रावधान किया गया है। उनका कहना है कि चंडीगढ़ को अधिकार चाहिए न कि कोई भीख।इनके गठन से चंडीगढ़ में लोकतंत्र मजबूत होगा, जबकि एडवाइजरी काउंसिल से कुछ नहीं होगा।
उधर, चंडीगढ़ कांग्रेस के नेताओं ने चंडीगढ़ की प्रशासक की सलाहकार समिति के पुनर्गठन पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि इस समिति के गठन में दलितों, गरीबों, मजदूरों, ट्रेड यूनियनों. कालोनियों, गांवों, छात्रों, पिंड बचाओ कमेटी के साथ समाज के कई वर्गों की उपेक्षा की गई है।
यहां जारी एक बयान में कांग्रेस प्रवक्ता राजेश शर्मा, डाक्टर ओपी वर्मा, राकेश गर्ग, अश्विनी कौशल, कृष्ण लाल और पूर्व मेयर कमलेश ने कहा कि कमेटी में समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है और सलाहकार समिति का असली उद्देश्य ही खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के पंचकूला विधायक ज्ञान चंद गुप्ता को इसमें लिया गया तो फिर मोहाली के विधायक को क्यों शामिल नहीं किया गया है। नेताओं ने कहा कि सलाहकार समिति में सिर्फ भाजपा के कुछ नेताओं की ही चली है जिन्होंने ज्यादा कर अपने समर्थकों को लिया गया है
यह आरएसएस की काउंसिल
युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हरमेल केसरी ने कहा कि यह प्रशासन की एडवाइजरी नहीं बल्कि आरएसएस की काउंसिल का गठन किया गया है जिसमें अधिकतर भाजपा नेताओं को ही शामिल किया गया है। जबकि दलित रक्षा दल के अध्यक्ष नरेंद्र चौधरी ने भी गठन पर सवाल उठाया है।