पीजीआई में प्लेजरिजम (शोधपत्र में डाटा कापी करना) पर बनाई गई नई गाइडलाइंस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गाइडलाइंस में यह कहीं भी प्रावधान नहीं किया गया कि आखिर प्लेजरिजम के आरोपी पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
जांच कितने समय में पूरी होनी है, इसके बारे में भी कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। सिर्फ इतना उल्लेख किया गया कि जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी। उसका समय तय होगा, लेकिन कितना होगा इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
पीजीआई मेडिकल टेक्नोलाजिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अश्विनी मुंजाल ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे यह गाइडलाइंस को बचाने के लिए बनाई गई हैं। अहम सवाल यह है कि आखिर इतने दिनों बाद गाइडलाइंस क्यों बनाई गई। जो पहले पकड़े गए हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी या की जा रही है?