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एक देश एक भाषा का समर्थन करने वाले पंजाबी लोक गायक केएस मक्खन ने छोड़ा सिख स्वरूप

Tue, 01 Oct 2019 07:05 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
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लोक गायक केएस मक्खन - फोटो : सोशल मीडिया
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एक राष्ट्र एक भाषा विवाद में गुरदास मान का समर्थन करने वाले लोक गायक केएस मक्खन ने सिखी स्वरूप छोड़ दिया। इससे पहले मक्खन ने फेसबुक पर लाइव होकर अपना दर्द सांझा किया। मक्खन ने कहा कि पंजाबी पंजाबी से न लड़े, सिख प्रचारकों ने पंजाबी के मुद्दे को सिखी से जोड़ दिया। मेरी सिखी पर सवाल खड़े कर दिए। मेरी सिखी आंखों में खटकती है, मैं नहीं चाहता कि मेरे कारण सिखी का नुकसान हो। 

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मैं सिखी का फायदा नहीं कर सकता तो मेरे पास हक नहीं है कि मैं नुकसान करूं। मुझे तीन दिन से नींद नहीं आ रही। मैं दुख के साथ सारे ककार गुरु महाराज के चरणों में समर्पित कर रहा हूं। मेरे से बर्दाश्त नहीं हो रहा। मैं गलत हूं तो मेरी बात करो, मुझे समझाओ, मैंने घर ताले नहीं लगा रखे। हरेक को मौका जरूर दो, अपनी बात करने का।

 बुद्धिजीवियों को चाहिए कि मुझे बुलाकर अपनी बात बताएं न कि बुरा भला कहें। सिख प्रचारकों को निकट होकर देखा, अपनी टीआरपी बढ़ाने का काम करते हैं। उनको भी पूछने वाला कोई होना चाहिए। 
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नकोदर के रहने वाले केएस मक्खन 2014 में बसपा की टिकट पर श्री आनंदपुर साहिब से चुनाव भी लड़ चुके हैं। गुरदास मान की ओर से हिंदी के पक्ष में दिए गए बयान का मक्खन ने समर्थन किया था। इसके बाद केएस मक्खन पंजाबी समर्थकों और कई लोगों के निशाने पर आ गए। वहीं मक्खन अब सवालों से बच रहे हैं। उन्होंने सिख स्वरूप त्यागने के बाद सोमवार दोपहर तीन बजे प्रेस कांफ्रेंस रखी थी लेकिन वह नहीं आए। 

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इसकी जगह रहीमपुर से बाबा प्रगट नाथ में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि 12 तारीख को वह रहीमपुर से शोभायात्रा अमृतसर लेकर जाएंगे। अमृतसर में भगवान वाल्मीकि धाम पर पहुंचने के बाद गायक केस मक्खन शोभायात्रा में शिरकत करेंगे। 13 अक्तूबर को भगवान वाल्मीकि प्रकट उत्सव के दौरान भी केएस मक्खन साथ ही रहेंगे।

गायक मक्खन नशा तस्करी के एक मामले में जेल भी जा चुके हैं। जालंधर के नकोदर थाने में 1 अगस्त, 2006 को मक्खन के खिलाफ तस्करी का केस दर्ज हुआ था। उन पर कनाडा में ड्रग्स रैकेट चलाने का आरोप था। इस मामले में मक्खन को जेल भी जाना पड़ा था।

मक्खन के फैसले को एसजीपीसी ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण 
प्रसिद्ध लोक गायक केएस मक्खन के सिखी स्वरूप छोड़ देने के फैसले को एसजीपीसी अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। लौंगोवाल ने कहा कि गुरु साहिबान और सिख कौम ने ककारों की रक्षा के लिए अपनी जानें न्योछावर की हैं। लोक गायक आज जिस मुकाम पर पहुंचे है, वह मां बोली पंजाबी की बदौलत है। 

सभी पंजाबियों को मां बोली का सम्मान करना चाहिए। यदि गुरदास मान अपनी गलती की माफी मांगते हैं, तो उन्हें माफ कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा आठ सिख कैदियों की रिहाई और बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का स्वागत है। इनकी रिहाई के लिए एसजीपीसी कई साल से संघर्ष कर रही थी। 
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