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पंजाबी सिनेमा बचा रहा लोक संस्कृति

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चंडीगढ़। नॉर्थ जोन फिल्म एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (नजफटा) की ओर से लिखित और मलकीत रौनी की ओर से संपादित पुस्तक पंजाबी स्क्रीन के सिनेमा संपादकीय लेख का वीरवार को विमोचन किया गया। पुस्तक का लोकार्पण सेक्टर-70 में डॉ. सतीश कुमार वर्मा और बाबू मान सिंह ने किया। अदाकार गुग्गु गिल्ल ने बताया कि सिनेमा हमारी जान है। हम अंतिम सांस तक मां बोली पंजाबी सिनेमा के लिए काम करते रहेंगे। पुस्तक में फिल्मों में भाषा, संगीत, पहरावा, क्षेत्र के अनुसार लोकगीत इत्यादि पर आधारित लेख है। इसे सिनेमा से जुड़े कई वरिष्ठ कलाकारों की ओर से लिखा गया है।
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डॉ. सतीश वर्मा ने बताया कि सिनेमा संबंधी पंजाबी में बहुत ही कम साहित्य लिखा गया है, इसलिए दलजीत अरोड़ा और मलकीत रौनी का प्रयास सराहनीय है। गीतकार बब्बू मान ने कहा कि सिनेमा के बारे में शोध करने वाले युवाओं के लिए यह पुस्तक कारगर सिद्ध होगी। कार्यक्रम में करमजीत अनमोल, बलकार सिद्धू, स्वराज संधू, मुनीष साहनी, शविन्द्र माहल, नाटककार जगदीश सचदेवा रत्न औलख, आशीष दुग्गल, गुरप्रीत कौर भंगू, रूपिंदर रूपी, प्रकाश गाधू, शितज चौधरी, मनभावन सिंह, मनदीप सिंह, देवी शर्मा, साहिल कोहली, दीपक गुप्ता, मनमोहन सिंह, मुनीष साहनी, तरसेम पाल, परमजीत भंगू, रणजीत शर्मा, कंवलजीत प्रिंस, सुरिंदर फरिश्ता (घुल्ले शाह), राज धालीवाल, भूपिंदर बरनाला, मनोज चौहान, गुरबिंदर मान, इकत्तर सिंह, हरविंदर औजला, परमवीर, गुरप्रीत सिंह नीटू, लाली गिल्ल, सुक्खी चाहल, अमन जौहल, जस्स सैंपला, मनजोत अरोड़ा, संजू सोलंकी, भूवन अजाद, मनप्रीत कौर आदि उपस्थित रहे।
सिनेमा से पंजाबी बोली का विदेशों में हुआ प्रसार
नजफटा के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह घुग्गी ने बताया कि पंजाबी मां बोली के प्रचार और प्रसार का सबसे बड़ा साधन सिनेमा है। पंजाबी फिल्में लगभग 100 देशों में रिलीज हो रही हैं, इसलिए क्षेत्रीय सिनेमा को साहित्य के जरिए लोगों तक पहुंचाने का यह प्रयास सराहनीय है।
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