मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के विभिन्न भागों में महिलाओं से दुर्व्यवहार की घटना की शिकायतें मिल रही हैं, जिन पर राज्य महिला आयोग एक्ट 2001 के तहत कार्रवाई की जा रही है। फिर भी आयोग द्वारा महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए, अब तक मिली सूचनाओं के आधार पर राज्य सरकार से उक्त सिफारिश की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में लुधियाना के एक निजी स्कूल में समारोह के दौरान पंजाब के कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू द्वारा एक महिला अधिकारी के देर से पहुंचने पर उन्हें सार्वजनिक तौर पर काफी फटकार लगाई थी। इस संबंध में सोशल मीडिया पर काफी दिनों तक आशू चर्चा का विषय बने रहे। इस मामले से पहले पंजाब के एक अन्य कैबिनेट मंत्री के खिलाफ मी-टू मामले में सवाल खड़े हुए थे।
उसमें भी महिला अधिकारी द्वारा आरोप लगाया गया था कि मंत्री उन्हें परेशान कर रहे हैं। इसके बाद महिला आयोग ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश जारी किए थे कि कोई भी मंत्री या अधिकारी किसी महिला कर्मचारी या अधिकारी को साथ बैठाकर अकेले बैठक नहीं कर सकते। ऐसी बैठक में किसी अन्य महिला अधिकारी को साथ बैठाना अनिवार्य किया गया है।