फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pearls Scam: पर्ल्स घोटाले की जांच अब पंजाब विजिलेंस के हाथ, संपत्ति बेचकर होगी वसूली, एक्शन में मान सरकार

Sun, 21 May 2023 11:54 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पर्ल्स एग्रो कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) जिसे पर्ल्स ग्रुप के नाम से जाना है, ने पंजाब सहित देशभर में पांच करोड़ आम लोगों से खेती और रियल एस्टेट जैसे कारोबार के आधार पर लगभग 60,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। कंपनी ने यह निवेश 18 वर्षों के दौरान गैरकानूनी तरीके से हासिल किया।
विज्ञापन
पर्ल्स रेजीडेंसी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब सरकार ने हजारों करोड़ के पर्ल्स घोटाले की जांच राज्य विजिलेंस को सौंप दी है। हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पर्ल्स ग्रुप की ठगी के शिकार लोगों को न्याय दिलाने और पर्ल्स ग्रुप की संपत्तियां बेचकर उनके पैसे की भरपाई कराने का वादा किया था।

विज्ञापन


ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (बीओआई) ने पर्ल्स घोटाले को लेकर फिरोजपुर जिले के जीरा थाने में दर्ज एफआईआर नबंर 79 (2020) और स्टेट क्राइम पुलिस थाना मोहाली में दर्ज एफआईआर नंबर-1/2023 की जांच का काम विजिलेंस को सौंप दिया है। यह जांच विजिलेंस का इकनोमिक विंग करेगा।

इस संबंध में बीओआई के निदेशक की ओर से जारी आदेश में कहा है कि दोनों एफआईआर की जांच, जो एडीजीपी बी. चंद्रशेखर द्वारा की जा रही थी, को प्रशासनिक आधार पर तत्काल प्रभाव से विजिलेंस पंजाब में स्थानांतरित किया जा रहा है।
विज्ञापन


जानकारी के अनुसार विजिलेंस को यह जांच सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर की गई है, जिसमें कमेटी ने सिफारिश की थी कि पर्ल्स ग्रुप में पैसा लगाने वाले लोगों से बड़े पैमाने पर ठगी हुई है, इसलिए मामले की विशेष तौर पर जांच होनी चाहिए। हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी एलान किया था कि पर्ल्स ग्रुप की पंजाब में बनी संपत्तियों को सरकार कब्जे में लेकर बेचेगी और ठगी का शिकार हुए लोगों को उनका पैसा वापस मिलने का रास्ता साफ किया जाएगा।

क्या है पर्ल्स घोटाला
पर्ल्स एग्रो कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) जिसे पर्ल्स ग्रुप के नाम से जाना है, ने पंजाब सहित देशभर में पांच करोड़ आम लोगों से खेती और रियल एस्टेट जैसे कारोबार के आधार पर लगभग 60,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। कंपनी ने यह निवेश 18 वर्षों के दौरान गैरकानूनी तरीके से हासिल किया। जब लौटाने की बारी आई तो कंपनी पीछे हटने लगी। तब इस मामले में सेबी ने दखल दिया था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इस कंपनी के निवेशक लंबे समय से अपना पैसा वापस पाने का इंतजार कर रहे हैं। 

मामले की सीबीआई जांच भी जारी है और सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए जस्टिस आरएम लोढ़ा की अगुवाई में कमेटी का गठन किया, जिसके समक्ष जांच के दौरान डेढ़ करोड़ लोगों ने रिफंड क्लेम भी पेश किए। 2016 में गठित जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने पीएसीएल और उससे जुड़ी संस्थाओं की संपत्तियों को बेचकर 878.20 करोड़ रुपये रिकवर कर लिए हैं। कमेटी ने जिन संपत्तियों से रिकवरी की कार्रवाई की है, उनमें ऑस्ट्रेलिया स्थित पर्ल्स इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कंपनियां भी शामिल हैं। उससे कंपनी ने 369.20 करोड़ की रिकवरी की है।

इसके अलावा 308.04 करोड़ सरकार ने पर्ल्स ग्रुप और उसकी सहयोगी कंपनियों के खातों को फ्रीज कर जुटाए। इनमें कंपनी के फिक्स्ड डिपोजिट से 98.45 करोड़ रुपये भी हासिल किए। कंपनी के 75 लग्जरी वाहनों को बेचकर 15.62 करोड़ रुपये हासिल किए हैं। वहीं, कंपनी की संपत्ति से जुड़े छह दस्तावेजों से 69 लाख रुपये हासिल हुए हैं। कंपनी के मालिक समेत 117 अधिकारी और हिस्सेदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं और कंपनी की सभी संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें