आय से अधिक संपत्ति के मामले में पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की 18 अगस्त की रात को हुई गिरफ्तारी को अवैध हिरासत बताते हुए 19 अगस्त की देर रात उन्हें रिहा करने के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को वापस लेने की मांग विजिलेंस ने अर्जी दाखिल कर की है। इस याचिका पर हाईकोर्ट अब मंगलवार को सुनवाई करेगा। उधर, सैनी ने उन्हें पूरे सेवा काल में हुई एफआईआर मामले में मिली राहत से जुड़ी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की है।
पंजाब विजिलेंस ने कहा कि हाईकोर्ट ने सुमेध सिंह सैनी को 12 अगस्त को अंतरिम जमानत देते हुए 7 दिन में जांच में शामिल होने का आदेश दिया था। सैनी हाईकोर्ट के आदेश के तहत आखिरी दिन और वह भी रात 8 बजे जांच में शामिल होने पहुंचे थे। इस तरह सैनी ने हाईकोर्ट के आदेश का सही पालन नहीं किया।
विजिलेंस ने बताया कि सैनी को 18 अगस्त की रात को एफआईआर संख्या 13 में नहीं बल्कि एफआईआर संख्या 11 में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उन्हें हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली थी। विजिलेंस ने कहा कि सैनी की गिरफ्तारी को हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को यह कहते हुए अवैध हिरासत बताया था कि उन्हें 11 अक्तूबर 2018 और 23 सितंबर 2020 के आदेशों का उल्लंघन कर गिरफ्तार किया गया है, जो सही नहीं है।
अर्जी में कहा गया कि 18 अगस्त की रात को सैनी की गिरफ्तारी को अवैध हिरासत नहीं कहा जा सकता है। सैनी को एफआईआर संख्या 11 के तहत गिरफ्तार कर अगले दिन हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले ही मोहाली की जिला अदालत में पेश किया जा चुका था। मोहाली की अदालत ने उन्हें रिमांड नहीं दिया था।
लिहाजा सैनी के मामले में हाईकोर्ट ने 19 अगस्त देर रात को जो आदेश दिए हैं वह सही नहीं हैं। 19 अगस्त को अदालत ने कई दलीलों को नजरअंदाज कर अपना फैसला सुना दिया था। ऐसे में उस आदेश को वापस लिया जाए और सैनी को मिली अंतरिम जमानत के आदेश को भी वापस लिया जाए।