पूर्व अकाली मंत्री जनमेजा सिंह सेखों।
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1200 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले में शुक्रवार को विजिलेंस ब्यूरो ने पूर्व अकाली मंत्री जनमेजा सिंह सेखों (78) से पूछताछ की। विजिलेंस ने उनसे आठ घंटे तक दो चरणों में सवाल जबाव किए। इस दौरान जांच अधिकारियों ने सिंचाई विभाग में होने वाले कामों में मंत्री और अफसरों की भूमिका को जानने की कोशिश की। शाम को विजिलेंस दफ्तर से जाते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है। सारी प्रक्रिया राजनीति से प्रेरित है। पूछताछ में विजिलेंस को पूरा सहयोग दिया जाएगा।
पूर्व मंत्री जनमेजा सिंह सेखों करीब साढ़े 10 बजे विजिलेंस ब्यूरो के मोहाली स्थित मुख्यालय पहुंचे थे। वहां पर पहले से मौजूद तीनों टीमों ने दो चरणों में उनसे पूछताछ शुरू की। इस दौरान उनसे पूछा गया कि आखिर सिंचाई विभाग किस तरह काम करता है। विकास कार्य के टेंडर लगाने की प्रक्रिया क्या है, जो काम करवाया जाना होता है उसके एस्टिमेट किसके आदेश पर तैयार होते हैं। एक ठेकेदार को एक साल में कितने लाख तक काम अलॉट जा सकता है। साथ ही, ठेकेदार की ओर से लगाए गए आरोपों के संबंध में भी सवाल जवाब किए गए। आखिर में उनसे सवाल जवाब से जुड़ा प्रोफार्मा भरवाया गया।
दो आईएएस अफसरों से हो चुकी है पूछताछ
इस मामले में अब तक विजिलेंस ब्यूरो दो पूर्व आईएएस अधिकारियों काहन सिंह पन्नू और केबीएस सिद्धू व पूर्व मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों से पूछताछ कर चुकी है। पूर्व आईएएस अधिकारी सर्वेश कौशल भी चंडीगढ़ में पहुंच गए हैं। उन्होंने विजिलेंस को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें पूछताछ के लिए तय समय पर बुलाया जाए, ताकि बाद में उन्हें परेशानी न उठानी पड़े। वहीं, मुख्य आरोपी ठेकेदार गुरिंदर सिंह की तरफ अदालत में प्रापर्टी रिलीज करने के लिए लगाई गई याचिका को मंजूर कर लिया गया है।