अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान सूबे में पहली बार वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवी-पैट) का प्रयोग किया जाएगा। इससे वोटर यह जान सकेंगे कि उनका वोट सही कैंडिडेट को गया भी है या नहीं। इसका प्रयोग 2014 के लोकसभा चुनाव में किया गया था।
मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. नसीम जैदी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि अभी यह तय नहीं किया गया है कि कितने पोलिंग बूथों पर यह सुविधा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सियासी पार्टियों ने ईवीएम को लेकर आशंका जताई है। पर ईवीएम टैंपर प्रूफ है, इसमें गड़बड़ नहीं की जा सकती।
उन्होंने बताया कि सात सितंबर 16 तक पंजाब में कुल 19214509 वोटर थे। जिनमें 10162170 पुरुष, 9052066 महिलाएं और 273 थर्ड जेंडर शामिल हैं। एक सितंबर के बाद एक माह तक 619073 आवेदन आए। इनमें 225000 पहली बार वोट के थे। 185645 लोगों ने वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के लिए आवेदन किया था। उन्होंने कहा कि पंजाब में 18-19 साल के वोटरों की संख्या कम है, इसे बढ़ाने को रणनीति बनाने को कहा गया है।
इसके लिए कॉलेजों में छह सौ कैंपस एंबेसडर नियुक्त किए गए हैं। वोटर लिस्ट जनवरी में प्रकाशित होगी, पर वोट के लिए अभी भी आवेदन किया जा सकता है। पंजाब के पोलिंग स्टेशन पर सभी बुनियादी सुविधाएं हैं, कुछ जगह महिला शौचालय नहीं हैं, जिसके लिए सरकार को कहा गया है।
जिला अधिकारियों को कहा गया है कि कैंपेन शुरू करें ताकि वोटिंग प्रतिशत 80 से ज्यादा हो सके। पंजाब में फोटो आईडी कार्ड का सौ फीसदी लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। रिटर्निंग अफसरों के लिए भी सर्टिफिकेशन प्रोग्राम शुरू किया गया है, ताकि गलतियों को रोका जा सके।
डिसेबल्ड प्रेंडली होगा चुनाव
मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. नसीम जैदी ने बताया कि इस बार चुनाव को डिसेबल्ड फ्रेंडली बनाने का फैसला किया गया है, जिसमें विकलांगों के वोट बनाने से लेकर वोट डालने की प्रक्रिया शामिल है। इसके लिए विकलांगों की मैपिंग शुरू की गई है, जिससे पता चल जाएगा कि किस बूथ पर कितने विकलांग वोटर हैं। उसी के मुताबिक उनके लिए व्हील चेयर आदि सुविधाओं का इंतजाम किया जाएगा।
मेनिफेस्टो पर रहेगी नजर
चुनाव आयोग की नजर सियासी पार्टियों के मेनिफेस्टो पर भी रहेगी। मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. नसीम जैदी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मेनिफेस्टो पर 2013 में फैसला दिया था, जिसके बाद आयोग ने इस पर चैप्टर आठ बनाया है। इसमें मेनिफेस्टो के बारे में सारी गाइडलाइंस हैं। पार्टियां आयोग को मेनिफेस्टो देती हैं, गड़बड़ मिलने पर उन्हें नोटिस दिया जाता है।