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Punjab Budget Session: ताला-चाबी लेकर पहुंचे सीएम ने कहा-सदन को अंदर से लॉक लगा दें, विपक्ष का हंगामा

Mon, 04 Mar 2024 03:18 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

बजट सत्र के पहले दिन भी प्रताप बाजवा के नेतृत्व में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों ने सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी और भारी शोरगुल व हंगामे के चलते राज्यपाल अपना भाषण भी नहीं पढ़ सके थे।  
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कांग्रेसियों का सदन से वॉकआउट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। ताला-चाबी लेकर सदन में पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पीकर से कहा कि आज विपक्ष के लोग भाग जाएंगे, इसलिए अंदर से लॉक लगा दिया जाए।
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सीएम के इस बयान पर सदन में विपक्ष ने हंगामा कर दिया। नौबत हाथापाई तक आ पहुंची। मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष में तीखी नोक-झोंक हुई। कांग्रेस विधायक वेल में जाकर चार घंटे तक नारेबाजी करते रहे। सत्तापक्ष और विपक्ष में खूब तंज कसे गए। हंगामे के बीच सदन चलता रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पीकर को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।


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सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान जब सदन में पहुंचे, तो उनके हाथ में एक लिफाफा था। उन्होंने स्पीकर कुलतार संधवां से कहा कि वह उनके लिए एक तोहफा लेकर आए हैं। उन्होंने स्पीकर से लिफाफा खोलने के लिए कहा, जिसमें एक ताला और चाबी निकले। सीएम ने कहा-आज मैं सच बोलूंगा, तो विपक्ष के लोग बाहर भाग जाएंगे। विपक्ष बाहर न जा पाए, इसलिए अंदर से ताला लगा दिया जाए। इस पर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया।

नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने सीएम को चुनौती दी कि हिम्मत हो तो ताला लगाकर दिखाएं। वे भागेंगे नहीं। इसी बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई। कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक आमने-सामने आ गए। नौबत हाथापाई तक पहुंचने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। हालांकि, स्पीकर ने कहा कि ताला लगाने का मुद्दा प्रतीकात्मक है ताकि सदन में चर्चा हो सके।





कार्यवाही स्थगित किए जाने के बाद भी कांग्रेस और आप के विधायक सदन में जमे रहे। इसी बीच, नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी पर आप के विधायक विपक्षी बेंच की ओर लपके। सीएम मान और बाजवा के बीच नोक-झोंक तू-तू, मैं-मैं में बदल गई। इस दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेताओं ने बीच बचाव भी किया। सीएम ने कहा कि कांग्रेस के नेता अपनी पत्नियों के लिए लोकसभा टिकट मांग रहे हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को लोकसभा चुनाव लड़ने की चुनौती दी, जिसे स्वीकार करते हुए बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री जहां से भी चुनाव लड़ना चाहें लड़ लें, वह उनके खिलाफ मैदान में उतरेंगे।
 
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पंद्रह मिनट बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने पर मंत्री बलकार सिंह ने प्रस्ताव पेश किया कि संदीप जाखड़ को छोड़ कर कांग्रेस के सभी विधायकों ने एक मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण में व्यवधान पैदा किया। कांग्रेस विधायकों ने सदन की अवमानना की है। यह मामला विशेषाधिकार कमेटी को भेजा जाए। स्पीकर ने प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इसे विशेषाधिकार कमेटी को भेज दिया। इस बीच, सदन में भारी हंगामा होता रहा। जैसे ही सीएम बोलने के लिए उठे, कांग्रेसी विधायकों वेल में स्पीकर की चेयर के सामने पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी।

खैरा से बोले मान-कांग्रेस में ही हो
हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने सुखपाल सिंह खैरा से पूछा कि आप अभी कांग्रेस में ही हो या किसी दूसरी पार्टी में चले गए हो? इस पर कांग्रेस विधायक और भड़क गए। उन्होंने वेल में सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामा बढ़ता देख, स्पीकर ने एक बार फिर से सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

कांग्रेस की मांग, पहले सदन को ताला लगाओ
दूसरी बार स्थगन के बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो कांग्रेसी सदस्य इस बात पर अड़ गए कि पहले सदन को भीतर से ताला लगाया जाए। उन्होंने फिर से नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि, इस दौरान स्पीकर लगातार दोनों पक्षों से राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस शुरू करने और सदन की मर्यादा बनाए रखने का आग्रह करते रहे।

सीएम बोले-मेरे पास सबकी फाइलें
इसी बीच, मुख्यमंत्री मान ने कहा कि मई महीने में लोग इस पार्टी (कांग्रेस) को पक्का ताला लगा देंगे और लोकसभा चुनाव में 13-0 से मुकाबला होगा। इस पर सदन में नारेबाजी और तेज हो गई। इस पर सीएम ने फिर कहा- कोई बात नहीं, थोड़े दिन शोर मचा लो। मेरे पास सभी कांग्रेसियों की फाइलें मौजूद हैं। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वंड़िग पर तंज कसते हुए कहा कि लोग पंजाब आकर बसों की बॉडी बनवाते हैं और इन्होंने कांग्रेस प्रभारी के कहने पर राजस्थान से बसों की बॉडी बनवाई, जिसकी जांच की जाएगी।

पहले चर्चा, फिर प्रश्नकाल
मुख्यमंत्री मान ने कांग्रेसी सदस्यों की ओर से पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण को बाधित करने की निंदा करते हुए स्पीकर से मांग की कि वह राज्यपाल के अभिभाषण पर पहले चर्चा कराएं। कुछ आप विधायकों ने भी सीएम का समर्थन किया, जिसे स्वीकार करते हुए स्पीकर संधवां ने परंपरा से हटकर सदन की कार्यवाही की शुरुआत में प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के बजाय राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा की अनुमति दे दी। चर्चा के बाद स्पीकर ने शाम के समय प्रश्नकाल और शून्यकाल का कार्यवाही पूरी की।
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