पंजाब विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। ताला-चाबी लेकर सदन में पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पीकर से कहा कि आज विपक्ष के लोग भाग जाएंगे, इसलिए अंदर से लॉक लगा दिया जाए।
सीएम के इस बयान पर सदन में विपक्ष ने हंगामा कर दिया। नौबत हाथापाई तक आ पहुंची। मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष में तीखी नोक-झोंक हुई। कांग्रेस विधायक वेल में जाकर चार घंटे तक नारेबाजी करते रहे। सत्तापक्ष और विपक्ष में खूब तंज कसे गए। हंगामे के बीच सदन चलता रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पीकर को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान जब सदन में पहुंचे, तो उनके हाथ में एक लिफाफा था। उन्होंने स्पीकर कुलतार संधवां से कहा कि वह उनके लिए एक तोहफा लेकर आए हैं। उन्होंने स्पीकर से लिफाफा खोलने के लिए कहा, जिसमें एक ताला और चाबी निकले। सीएम ने कहा-आज मैं सच बोलूंगा, तो विपक्ष के लोग बाहर भाग जाएंगे। विपक्ष बाहर न जा पाए, इसलिए अंदर से ताला लगा दिया जाए। इस पर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने सीएम को चुनौती दी कि हिम्मत हो तो ताला लगाकर दिखाएं। वे भागेंगे नहीं। इसी बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई। कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक आमने-सामने आ गए। नौबत हाथापाई तक पहुंचने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। हालांकि, स्पीकर ने कहा कि ताला लगाने का मुद्दा प्रतीकात्मक है ताकि सदन में चर्चा हो सके।
कार्यवाही स्थगित किए जाने के बाद भी कांग्रेस और आप के विधायक सदन में जमे रहे। इसी बीच, नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी पर आप के विधायक विपक्षी बेंच की ओर लपके। सीएम मान और बाजवा के बीच नोक-झोंक तू-तू, मैं-मैं में बदल गई। इस दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेताओं ने बीच बचाव भी किया। सीएम ने कहा कि कांग्रेस के नेता अपनी पत्नियों के लिए लोकसभा टिकट मांग रहे हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को लोकसभा चुनाव लड़ने की चुनौती दी, जिसे स्वीकार करते हुए बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री जहां से भी चुनाव लड़ना चाहें लड़ लें, वह उनके खिलाफ मैदान में उतरेंगे।