पंजाब यूनिवर्सिटी को बंद होने से हाईकोर्ट ने बचा लिया है। फिलहाल इसकी हालत स्थिर है, लेकिन अभी भी पीयू के सामने संकट बना हुआ है। पंजाब यूनिवर्सिटी ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को हलफनामे के माध्यम से यह जानकारी दी है। पीयू की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद केंद्र सरकार ने ग्रांट को बढ़ा कर 207.8 करोड़ तथा पंजाब सरकार ने 20 करोड़ से बढ़ा कर 27 करोड़ कर दिया है।
ग्रांट बढ़ने से पीयू की वित्तीय हालत में फिलहाल सुधार है, लेकिन केंद्र और पंजाब दोनों ने प्रति वर्ष केवल 6 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया है जो यूनिवर्सिटी के बढ़ते खर्च के हिसाब से नाकाफी है। टीचिंग स्टाफ के लिए मिलने वाली ग्रांट 207.80 करोड़ है जबकि 2018-19 में इस पर खर्च 220.27 करोड़ होगा जो 2019-20 में बढ़कर 233.49 करोड़ हो जाएगा।
पीयू ने कहा कि केंद्र सरकार सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटी को डेवलपमेंट ग्रांट जारी करती है लेकिन पीयू को यह ग्रांट जारी नहीं की जाती। पीयू को केवल पांच वर्ष में एक बार 80 करोड़ राशि जारी की जाती है जो रेगुलर ग्रांट से अतिरिक्त होता है लेकिन यह राशि आखिरी बार 2011 में जारी की गई थी। इसके बाद कोई अतिरिक्त राशि नहीं दी गई।
सातवां वेतन आयोग बड़ी समस्या
पीयू की ओर से बताया गया कि कर्मचारियों को सातवां वेतन आयोग अभी देना बाकी है। इसके लिए अतिरिक्त 77.84 करोड़ की जरूरत है जिससे एरियर का भुगतान किया जा सके। यह राशि एक बार चाहिए। हालांकि प्रतिवर्ष वेतन के लिए दी जाने वाली ग्रांट को पीयू की जरूरत को देखते हुए बढ़ाया जाना चाहिए न की इसे सीधा 6 प्रतिशत किया जाए।
विकास कार्य के लिए 282.57 करोड़ की दरकार
पीयू ने हाईकोर्ट को बताया कि अभी फिलहाल विकास कार्य के लिए पीयू को 282.57 करोड़ की जरूरत है। इसमें से गर्ल्स हॉस्टल के लिए 13 करोड़, टीचिंग फैकल्टी अपार्टमेंट के लिए 12 करोड़, 50 साल से पुराने सिंगल स्टोरी फ्लैट गिराने के लिए 36 करोड़ तथा 10 स्मार्ट लेक्चर थिएटर हॉल के लिए 59 करोड़ का खर्च मुख्य है।